सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को डिटेल में बताया कि क्वेश्चन पेपर कैसे चुना जाता है. उन्होंने बताया कि NEET का क्वेश्चन पेपर ले जा रही गाड़ी में GPS लगा है, छोटी सी मूवमेंट भी रिकॉर्ड हो जाती है.कई मॉडरेटर्स को क्वेश्चन बैंक तैयार करने के लिए कहा गया, उन्हें नहीं पता कि क्वेश्चन पेपर में कौन सा सवाल होगा.
एग्जाम प्रक्रिया में पहले 500 सवालों का बैंक तैयार किया जाता है
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सबसे पहले 500 सवालों का बैंक तैयार किया जाता है. इसके लिए कई अलग-अलग मॉडरेटर सवाल तैयार करते हैं. इन 500 सवालों में से 100-100 सवाल चुनकर 4 अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं. यह काम दूसरे मॉडरेटर करते हैं. इन चार प्रश्नपत्रों में से दो का चयन NTA के महानिदेशक (DG) करते हैं. इसके बाद चुने गए प्रश्नपत्रों को सीलबंद बॉक्स में रखकर दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है. वहां CCTV कैमरों और CISF की सुरक्षा में प्रिंटिंग होती है.
सीक्रेट कोड दर्ज करने पर ही बाॅक्स खोला जा सकता है
बॉक्स को खोलने की डिजिटल चाबी एक जिम्मेदार व्यक्ति के पास होती है. बॉक्स अपने आप नहीं खुल सकता. जब प्रिंटिंग प्रेस का मालिक NTA के महानिदेशक से संपर्क करता है और DG से मिलने वाला गुप्त कोड दर्ज करता है, तभी बॉक्स खोला जा सकता है. बॉक्स खुलने के बाद प्रिंटिंग प्रेस में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होती है.प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है, ताकि यह पता रहे कि पेपर के साथ क्या हुआ और सुरक्षा व्यवस्था में कोई सेंध न लगे.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से कहा कि वे राधाकृष्णन समिति, नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर एफिडेविट दाखिल करके जानकारी दें.
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