पुंछ में मारे गए लोगों के परिजन से मिलने जा रहीं महबूबा मुफ्ती को पुलिस ने रोका, धरने पर बैठीं

पुंछ जिले में सुरनकोट पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ढेरा की गली और बुफलियाज के बीच धत्यार मोड़ पर आतंकवादियों ने सेना के वाहनों पर घात लगाकर हमला कर दिया था, जिसमें चार जवान शहीद हो गए थे.

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पिछले दिनों मारे गए 3 नागरिकों के परिजन से मिलने जा रहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को पुलिस ने सुरक्षा कारणों से डीकेजी रोड पर रोक दिया. जिसके बाद महबूबा वहीं पर धरने पर बैठ गईं. उन्होंने कहा, मैं यहीं बैठी रहूंगी.

महबूबा मुफ्ती बोलीं- हम से कुछ छिपाने की हो रही कोशिश

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, बीजेपी अध्यक्ष रविंदर रैना यहां आ सकते हैं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता आ सकते हैं लेकिन वे हमें बताते हैं कि यहां कुछ खतरा है. मुझे लगता है कि यहां सबसे बड़ा खतरा ये लोग हैं. वे नहीं चाहते कि हम उन परिवारों से मिलें. फिर वे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं.

क्या है मामला

कथित तौर पर सेना की हिरासत में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई थी. दरअसल पुंछ जिले में सुरनकोट पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ढेरा की गली और बुफलियाज के बीच धत्यार मोड़ पर आतंकवादियों ने सेना के वाहनों पर घात लगाकर हमला कर दिया था, जिसमें चार जवान शहीद हो गए थे. सेना इस हमले के बाद 27 वर्ष से 42 वर्ष के आयुवर्ग के तीन आम नागरिकों को पूछताछ के लिए कथित तौर पर अपने साथ ले गई थी. वे तीनों लोग 22 दिसंबर को मृत मिले थे.

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मुफ्ती ने राज्यपाल से मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की थी

महबूबा मुफ्ती ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए आरोप लगाया था कि आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने कई युवाओं को उनके परिवारों को सूचित किए बिना हिरासत में रखा है.

पीडीपी ने पुंछ की तय यात्रा से पहले महबूबा को नजरबंद किए जाने का किया था दावा

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने दावा किया था कि पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को पुंछ जिले के सुरनकोट की उनकी निर्धारित यात्रा से पहले नजरबंद कर दिया गया था. पीडीपी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा था, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को सुरनकोट की उनकी निर्धारित यात्रा से पहले जबरन नजरबंद कर दिया गया. उनका सुरनकोट जाने का उद्देश्य स्थिति का आकलन करना और सेना की हिरासत में मारे गए पीड़ितों के परिवारों को सांत्वना देना था.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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