Manipur Violence: मणिपुर में NH पर बेरोकटोक दौड़ेंगी गाड़ियां, कुकी समूह के साथ मणिपुर और केंद्र के बीच बड़ी डील

Manipur Violence: हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर से एक अच्छी खबर सामने आ रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को मुक्त आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति बन गई है. इसके लिए गुरुवार को कुकी समूह, मणिपुर और केंद्र सरकार के बीच बैठक हुई और एक खोलने पर सहमत हुए.

Manipur Violence: गृह मंत्रालय ने बताया, केंद्र, मणिपुर और कुकी-जो समूहों के बीच गुरुवार को त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए. समझौते के तहत मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा जाएगा. बैठक के बाद कुकी-जो परिषद ने मणिपुर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलने का फैसला किया है. यह निर्णय गृह मंत्रालय (एमएचए) के अधिकारियों और केजेडसी के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच पिछले कुछ दिनों में नई दिल्ली में हुई कई बैठकों के बाद लिया गया है.

मणिपुर में स्थायी शांति पर भी बनी बात

मणिपुर में स्थायी शांति एवं स्थिरता लाने के लिए सरकार और कुकी समूह बातचीत के जरिए समाधान पर सहमत हुए. सरकार और कुकी समूह मणिपुर में संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से उग्रवादियों के 7 निर्धारित शिविरों को स्थानांतरित करने पर सहमत हुए.

हथियारों को सीआरपीएफ और बीएसएफ शिविरों में जमा करने पर भी बनी सहमति

गृह मंत्रालय ने बताया, “कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से दूर सात निर्दिष्ट शिविरों को स्थानांतरित करने, निर्दिष्ट शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को निकटतम सीआरपीएफ और बीएसएफ शिविरों में स्थानांतरित करने और सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कठोर भौतिक सत्यापन करने पर भी सहमति व्यक्त की है ताकि विदेशी नागरिकों (यदि कोई हो) को सूची से हटाया जा सके.”

पिछले दो साल से हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर

मणिपुर पिछले दो साल से हिंसा की आग में जल रहा है. 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसा ने अब तक 258 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा?

3 मई 2023 में हिंसा तब भड़की जब ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा देने के विरोध में “ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च” निकाला था. मार्च कुकी और नागा आदिवासियों द्वारा आयोजित किया गया था. मार्च के दौरान मैतेई और कुकी समुदाय के बीच झड़प हुई और हिंसा तेजी से पूरे राज्य में फैल गई.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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