Manipur Violence मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, मैतेई समुदाय की अपील- कुकी से न बात करे केंद्र

केंद्र, मणिपुर सरकार और दो कुकी उग्रवादी संगठनों– ‘कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन’ और ‘यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट’ के बीच एसओओ पर हस्ताक्षर किये गये थे. यह संधि 2008 में हुई थी जिसकी अवधि कई बार बढ़ाई गई.

मणिपुर 3 मई से हिंसा की आग में जल रहा है. रोजाना वहां से प्रदर्शन, आगजनी और हिंसा की नयी खबरें सामने आ रही हैं. मैतेई और कुकी समुदाय एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन बैठे हैं. दोनों ही समुदाय पीछे हटने और समझौता के मूड में नहीं है. नतीजा है कि राज्य पूरी तरह से अशांत हो चुका है. सरकार भी इसको लेकर चिंतित है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद वहां पहुंचकर शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन परिणाम सार्थक नहीं रहा. अब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठ रही है. जबकि मैतेई समुदाय ने केंद्र सरकार से अपील की दी है कि वे कुकी से बात नहीं करे.

मैतेई समुदाय ने केंद्र सरकार से कर दी ये अपील

इंफाल के कई नागरिक समाज संगठनों के साझा मंच ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटिग्रिटी (सीओसीओएमआई)’ ने मणिपुर में जारी अशांति के लिए कुकी उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराते हुए केंद्र से अपील की कि वह उनसे बात नहीं करे. सीओसीओएमआई ने यह भी दावा किया कि कुकी उग्रवादी संगठनों के सदस्य ‘विदेशी’ हैं. सीओसीओएमआई के संयोजक जितेंद्र निंगोम्बा ने कहा, मीडिया के सूत्रों से हमें सूचना मिली है कि भारत सरकार कुकी संगठनों के साथ बातचीत करने वाली है. हम पूरी तरह से इसके खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को संघर्ष विराम (एसओओ) से जुड़े संगठनों में से किसी के साथ वार्ता नहीं करनी चाहिए.

कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ सरकार की 2008 में हुई थी संधि

केंद्र, मणिपुर सरकार और दो कुकी उग्रवादी संगठनों– ‘कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन’ और ‘यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट’ के बीच एसओओ पर हस्ताक्षर किये गये थे. यह संधि 2008 में हुई थी जिसकी अवधि कई बार बढ़ाई गई. निंगोम्बा ने कहा, हम कुकी उग्रवादी संगठनों और भारत सरकार के बीच किसी भी वार्ता के विरूद्ध हैं क्योंकि ये संगठन विदेशी नागरिकों के संगठन हैं. उन्होंने कहा कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को कायम रखने और पृथक प्रशासन की अनुमति नहीं देने की अपनी मांग को लेकर सीओसीओएमआई 29 जुलाई को रैली आयोजित करेगी.

सीओसीओएमआई ने केंद्र सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

मणिपुर में चिन-कुकी-मिजो-जोमी से संगठन से संबद्ध 10 आदवासी विधायकों ने मैतेई और आदिवासियों के बीच हिंसक संघर्ष के आलोक में केंद्र से अपने समुदायों के लिए पृथक प्रशासन के गठन की अपील की है. इस बीच, नई दिल्ली में सीओसीओएमआई के प्रवक्ता के अथौबा ने राज्य और केंद्र सरकार पर मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, गुजरात दंगों (2002) के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने में चार दिन लगे लेकिन मणिपुर जैसे छोटे राज्य में बल की तैनाती के बावजूद हिंसा को नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सकता है. अथौबा ने असम राइफल्स पर उग्रवादियों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया, और कहा कि उनका समूह इस संबंध में साक्ष्य इकट्ठा कर रहा है. उन्होंने मांग की कि अर्धसैनिक बल की कुछ बटालियनों को राज्य से हटा दिया जाए. असम राइफल्स ने पहले ही सीओसीओएमआई के खिलाफ राजद्रोह और मानहानि का मामला दर्ज किया है क्योंकि संगठन के प्रमुख ने बहुसंख्यक समुदाय से हथियार न सौंपने का आह्वान किया था.

Also Read: 2 दिनों में 700 से भी ज्यादा म्यांमार नागरिकों ने मणिपुर में किया प्रवेश, असम रायफल्स से सवाल- कैसे हुए दाखिल

दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले के बाद मणिपुर में और स्थिति खराब

19 जुलाई को मणिपुर से एक वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के सामने आया. जिसने हिंसा की आग को और बढ़ा दिया. 30 सेकंड के वीडियो में 1000 से अधिक लोगों की भीड़ को दो महिलाओं को निर्वस्त्र का घुमाते हुए देखा गया. जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश बढ़ गयी. सड़क से लेकर संसद तक इस घटना की निंदा की गयी. हालांकि यह घटना 4 मई की बतायी जाती है. दो महीने के बाद एक्शन में आयी पुलिस ने अबतक इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार की है और 12 लोगों की पहचान कर ली है.

मणिपुर में 3 मई को भड़की हिंसा में अबतक 160 से अधिक लोगों की मौत

इस पूर्वोत्तर राज्य में करीब तीन महीने पहले जातीय हिंसा शुरू हुई थी जिसमें 160 से अधिक लोगों की जान चली गयी तथा सैकड़ों अन्य घायल हुए. मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान हिंसा भड़की थी. राज्य में मैतेई समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

Also Read: Explainer: मैतेई और कुकी समुदाय क्यों बने हैं जान के दुश्मन? जानें क्या है विवाद का असली कारण

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >