Manipur Violence: मणिपुर में एक और महिला के साथ दरिंदगी, लगाया सामूहिक दुष्कर्म का आरोप

मणिपुर में पिछले सौ दिन से जातीय हिंसा के बीच जोमी स्टूडेंट्स फेडरेशन (जेडएसएफ), कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (केएसओ) और हमार स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए) के संयुक्त छात्र निकाय ने गुरुवार को मणिपुर के चुराचांदपुर में एक रैली निकाली.

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो सामने आने के बाद जहां एक ओर देशभर में आक्रोश का माहौल है, वहीं अब हिंसाग्रस्त राज्य से एक और महिला के साथ दरिंदगी की खबर सामने आ रही है. चुराचांदपुर जिले की एक विवाहित महिला ने आरोप लगाया है कि तीन मई को अपने जलते हुए घर से भागते समय पुरुषों के एक समूह ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था.

नौ अगस्त को पुलिस में मामला दर्ज

पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में नौ अगस्त को बिष्णुपुर महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और बाद में इसे आगे की जांच के लिए चुराचांदपुर थाने में स्थानांतरित कर दिया गया. प्राथमिकी के मुताबिक, चुराचांदपुर जिले के खुमुजाम्बा मैतेई लेइकाई में कुकी समुदाय के कुछ अज्ञात पुरुषों ने महिला (37) के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था. पीड़ित महिला की ओर से पुलिस को दिए गए बयान के अनुसार, तीन मई को शाम 6.30 बजे के आसपास कुकी समुदाय के उपद्रवियों के एक समूह ने महिला के घर सहित कई घरों में आग लगा दी. अफरा-तफरी के बीच महिला ने भागने की कोशिश की. पुलिस ने प्राथमिकी के हवाले से बताया कि हालांकि, लगभग आधा किलोमीटर तक भागने के बाद, महिला को कुछ लोगों ने रोका और उसका यौन उत्पीड़न किया. मणिपुर में जनजातीय समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और उनके साथ छेड़छाड़ करने का एक वीडियो सामने आने के बाद राज्य में तनाव और बढ़ गया है.

जनजातीय छात्रों ने रैली निकाली

मणिपुर में पिछले सौ दिन से जातीय हिंसा के बीच जोमी स्टूडेंट्स फेडरेशन (जेडएसएफ), कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (केएसओ) और हमार स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए) के संयुक्त छात्र निकाय ने गुरुवार को मणिपुर के चुराचांदपुर में एक रैली निकाली. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छात्रों ने हिंसा को रोकने के लिए ग्राम रक्षा गार्डों द्वारा किए गए प्रतिरोध की सराहना की.

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आदिवासियों को श्रद्धांजलि देने के लिए रैली निकाली गयी

जेएसएफ के एक सदस्य ने कहा, यह दिन हमलावरों से लड़ने वाले आदिवासियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया गया. कुकी-जो आदिवासी तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और एक अलग प्रशासन का गठन नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि अलग प्रशासन की मांग 1960 के दशक से चली आ रही है और आदिवासी अवैध अप्रवासी नहीं हैं जैसा कि कुछ राजनेता दावा करते हैं. छात्र संगठन ने कहा कि जातीय संघर्ष में मारे गए आदिवासियों के सम्मान में एक मिनट का मौन भी रखा गया. संस्था ने 27 जुलाई को राज्यपाल अनुसुइया उइके को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में जारी हिंसा से प्रभावित कुकी-जोमी विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए आवश्यक उपाय करने की मांग की थी.

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मणिपुर के 40 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र

आदिवासी छात्रों के प्रति भेदभाव का आरोप लगाते हुए छात्र संगठन ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी. इस बीच, हिंसा प्रभावित मणिपुर के 40 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए पूर्ण निरस्त्रीकरण की आवश्यकता है. इन विधायकों में से अधिकांश मैतेई समुदाय के हैं. विधायकों ने कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते को वापस लेने, राज्य में एनआरसी लागू करने और स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) को मजबूत करने की भी मांग की. ज्ञापन में इन विधायकों ने कुकी समूहों की अलग प्रशासन की मांग का विरोध किया.

3 मई से हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. पूर्वोत्तर राज्य की आबादी में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

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