Manipur Violence: कुकी समुदाय ने दो महीने बाद खोला नेशनल हाइवे, ताजा हिंसा में तीन लोगों की मौत

यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शांति और सद्भाव बहाल करने का आह्वान किए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से नाकेबंदी हटा ली गई है.

मणिपुर में जारी हिंसा के बीच दो उग्रवादी संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर कांगपोकपी जिले में दो महीने से जारी नाकेबंदी हटा ली है. इस बीच ताजा हिंसा में तीन लोगों की मौत भी हो गयी है.

कुकी समुदाय और यूपीएफ ने गृह मंत्री की अपील के बाद खोला नेशनल हाइवे

यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शांति और सद्भाव बहाल करने का आह्वान किए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से नाकेबंदी हटा ली गई है. हालांकि, कुकी नागरिक समाज समूह ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (सीओटीयू) ने अभी तक आधिकारिक तौर पर आंदोलन वापस नहीं लिया है. सीओटीयू ने ही दो महीने पहले राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को अवरुद्ध करने की घोषणा की थी.

मणिपुर हिंसा में तीन लोगों की मौत, पांच घायल

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में अज्ञात बंदूकधारियों के साथ गोलीबारी में कम से कम तीन ग्राम स्वयंसेवक मारे गए और पांच अन्य घायल हो गए. पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि खोइजुमंताबी गांव में शनिवार देर रात को यह घटना हुई, जब ग्राम स्वयंसेवक अस्थायी बंकर से इलाके की रखवाली कर रहे थे. शुरुआत में दो शव बरामद किए गए और बाद में एक और शव मिला. पुलिस ने बताया कि गोलीबारी कई घंटे चली, जिसमें पांच लोग घायल भी हुए. पुलिस ने बताया कि इनमें से गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को इंफाल के अस्पताल ले जाया गया.

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मणिपुर हिंसा में अबतक 100 से अधिक लोगों की मौत

गौरतलब है कि राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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