धक्‍का-मुक्‍की और ‘कुर्सी टूट बैठक’ के बाद माणिक साहा ने त्रिपुरा के नये मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ

Tripura New CM : बिप्लब कुमार देब ने बैठक में जैसे ही 69 वर्षीय माणिक साहा के नाम का प्रस्ताव रखा, मंत्री राम प्रसाद पॉल ने इसका विरोध किया जिससे विधायकों के बीच धक्का-मुक्की हुई. सूत्रों ने कहा कि पॉल ने कुछ कुर्सियों को भी तोड़ दिया.

भाजपा ने आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए राज्यसभा सदस्य माणिक साहा को त्रिपुरा का नया मुख्यमंत्री बनाया है. साहा ने रविवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उन्होंने बिप्लब कुमार देब की जगह ली जिन्होंने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया. देब के राज्यपाल एसएन आर्य को अपना इस्तीफा सौंपे जाने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष साहा को मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर एक बैठक में विधायक दल का नेता चुना गया.

देब ने माणिक साहा के नाम का प्रस्ताव रखा

देब ने बैठक में जैसे ही 69 वर्षीय माणिक साहा के नाम का प्रस्ताव रखा, मंत्री राम प्रसाद पॉल ने इसका विरोध किया जिससे विधायकों के बीच धक्का-मुक्की हुई. सूत्रों ने कहा कि पॉल ने कुछ कुर्सियों को भी तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि पॉल चाहते थे कि त्रिपुरा के पूर्ववर्ती राजपरिवार के सदस्य जिष्णु देव वर्मा को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया जाए. भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव और विनोद तावड़े विधायक दल के नेता के चुनाव के पर्यवेक्षक थे.

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माणिक साहा ने क्‍या कहा

माणिक साहा ने खुद को मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि मैं पार्टी का एक आम कार्यकर्ता हूं और आगे भी रहूंगा. पचास वर्षीय देब ने नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के एक दिन बाद मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.

बिप्लब कुमार देब ने क्‍या कहा

बिप्लब कुमार देब ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि पार्टी सबसे ऊपर है. मैं भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं. मुझे लगता है कि जो जिम्मेदारी दी गई, उसके साथ मैंने न्याय किया फिर चाहे राज्य भाजपा इकाई के अध्यक्ष का पद हो या त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी. मैंने त्रिपुरा के संपूर्ण विकास के लिए कार्य किया और सुनिश्चित किया कि राज्य के लोगों के लिए शांति हो. उन्होंने पार्टी द्वारा उन्हें संगठनात्मक दायित्व सौंपे जाने के फैसले की व्याख्या करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनाव आ रहा है और पार्टी चाहती है कि जिम्मेदार संयोजक यहां प्रभार संभाले. सरकार तभी बन सकती है जब संगठन मजबूत हो.

वाम मोर्चे के 25 साल के शासन को भाजपा ने किया था समाप्‍त

यहां चर्चा कर दें कि पूर्वोत्तर राज्य में 2018 में वाम मोर्चे के 25 साल के शासन को समाप्त कर भाजपा के सत्ता में आने के बाद देब को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था. यहां चर्चा कर दें कि भाजपा ने त्रिपुरा में परोक्ष तौर पर सत्ता विरोधी लहर से पार पाने और पार्टी पदाधिकारियों के भीतर किसी भी तरह के असंतोष को दूर करने के एक प्रयास के तहत राज्य विधानसभा चुनाव में एक नये चेहरे के साथ उतरने की अपनी रणनीति अपनायी जो पूर्व में भी सफल रही है.

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