संगम तट पर गूंज रहा सनातन का मंत्र, मोनालिसा के बाद बासमाती-अफसाना की धूम

Magh Mela 2026: प्रयाग की सनातन परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत पहचान पंचकोसी परिक्रमा की माघ मेले में भव्य शुरुआत हो गयी है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के नेतृत्व में संगम तट पर गंगा पूजन के साथ इस परिक्रमा का शुभारंभ सोमवार को हुआ.

By ArbindKumar Mishra | January 7, 2026 9:26 AM

Magh Mela 2026: शुक्रवार तक चलने वाली इस परिक्रमा में साधु-संत पंचकोसी मार्ग पर श्रद्धा और अनुशासन के साथ भ्रमण करेंगे. अंतिम दिन साधु-संतों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जायेगा, गंगा पूजन के बाद साधु-संतों का समूह अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर पहुंचा, जहां दर्शन-पूजन के साथ पहले दिन की परिक्रमा का समापन हुआ. माघ मेला प्रशासन को इस आयोजन के दौरान यातायात और व्यवस्था संभालने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

मोनालिसा के बाद सोशल मीडिया में बासमती और अफसाना की धूम

माघ मेले में इस बार आस्था के साथ-साथ सोशल मीडिया की चमक भी खूब नजर आ रही है. पिछले वर्ष महाकुंभ में वायरल हुई मोनालिसा के बाद अब बासमती और अफसाना नाम की दो युवतियां चर्चा का केंद्र बन गयी है. माला बेचने आयी बासमती की कजरारी आंखें और सादगी लोगों को आकर्षित और वीडियो बनाने में व्यस्त दिख रहे हैं. वहीं, अफसाना का अनुभव थोड़ा अलग है. उनका कहना है कि लोग माला खरीदने से ज्यादा सेल्फी और वीडियो बनाने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है.

साज साल से खड़ा साधु, सबका खींच रहा ध्यान

प्रयागराज में आस्था का केंद्र बने माघ मेले में मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक माहौल के बीच साधुओं की विभिन्न भाव-भंगिमाएं और विचित्र व्यवहार बरबस ध्यान खींचते हैं. बिहार के सीतामढ़ी जिले के 26 साल के एक साधु अपनी एक अनोखी आध्यात्मिक प्रतिज्ञा के लिए लगातार सबको आकर्षित कर रहे हैं. उनका दावा है कि वह पिछले सात सालों से बैठे या लेटे नहीं हैं. शंकरपुरी के नाम से जाने जाने वाले इस युवा साधु को माघ मेले में एक पैर पर खड़े देखा गया. वह सोते समय भी अपने सिर को सहारा देने के लिए लकड़ी के सहारे का इस्तेमाल करते हैं. उनका कहना है कि वह खाने से लेकर पूजा-पाठ तक सभी रोजाना के काम खड़े होकर ही करते हैं. शंकरपुरी ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘मैं नैमिषारण्य का रहने वाला हूं. माना जाता है कि वहां 88 हजार ऋषि रहते हैं. मेरा जन्म वहीं हुआ था और उस पवित्र जगह पर मेरा एक आश्रम भी है. उसी धरती से मेरे मन में यह विचार आया कि मुझे खड़े रहना चाहिए. मैं छह साल की उम्र से संत हूं.

नागा साधु निरंजनी अखाड़ा, फोटो पीटीआई

15 फरवरी को संपन्न होगा माघ मेला

माघ मेला 44 दिनों का धार्मिक आयोजन है. तीन जनवरी को शुरू हुआ यह मेला 15 फरवरी को सम्पन्न होगा. इस दौरान लाखों भक्तों के संगम में पवित्र डुबकी लगाने की उम्मीद है.