एलपीजी संकट: होटल-रेस्तरां लकड़ी-कोयले पर लौटे, रसोई में हाहाकार!

LPG Crisis: ईरान पर इजराइल और अमेरिकी हमले से देशभर में एलपीजी को लेकर मारामारी की स्थिति बन गई है. सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल और रेस्तरां कोयला और लकड़ी पर लौटने के लिए मजबूर हो गए हैं.

LPG Crisis: राजस्थान के कई छोटे-बड़े भोजनालयों ने खाना पकाने के लिए कोयला और लकड़ी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे इनकी मांग में तेजी आई है.

लकड़ी की रोजाना खपत 100 किलोग्राम से बढ़कर 200-250 किलोग्राम हुआ

कोयला व्यापारी अयूब ने पीटीआई से कहा, पहले होटल और सड़क किनारे ढाबे सीमित मात्रा में कोयला इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब कई व्यवसाय बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी कर रहे हैं. लकड़ी की दैनिक खपत लगभग 100 किलोग्राम से बढ़कर 200-250 किलोग्राम तक पहुंच गई है. आने वाले दिनों में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है.

कोयले और लकड़ी की कीमत में इजाफा

एक अन्य लकड़ी व्यापारी मान केवालरामानी ने कहा कि बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी पड़ा है. उन्होंने कहा, पहले 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला कोयला अब लगभग 35 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. इसी तरह लकड़ी की कीमत आठ रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 10 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. कई होटल मालिक भविष्य में ईंधन की कमी से बचने के लिए थोक में बुकिंग कर रहे हैं. एक अन्य कोयला आपूर्तिकर्ता हीरा लाख्यानी ने कहा कि यदि एलपीजी की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पारंपरिक ईंधनों की मांग और उनकी कीमतें दोनों और बढ़ सकती हैं.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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