Kerala Next CM : केरल में सोमवार (4 मई) को मतगणना के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ साफ बढ़त बनाता दिख रहा है, जो एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक ही नजर आ रहा है. मतगणना के शुरुआती कुछ दौर के बाद यूडीएफ 140 विधानसभा सीट में से 100 पर आगे है जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) केवल 40 सीट पर बढ़त बनाए हुए है. यदि कांग्रेस की लीड वाला गठबंधन जीत दर्ज करता है तो पार्टी किसे मुख्यमंत्री के पद पर बैठाएगी? यह सवाल लोगों के मन में आ रहा है.
सीएम पद की रेस में तीन बड़े नेता आगे नजर आ रहे हैं. पहला नाम वी डी सतीशन का है, दूसरा नाम रमेश चेन्निथला जबकि तीसरा नाम के.सी. वेणुगोपाल का है. ये तीनों ही खुद को इस पद के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी के अंदर भी हलचल भी तेज हो गई है. के.सी. वेणुगोपाल इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वहीं रमेश चेन्निथला हरिपाड सीट से 7,000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. दूसरी तरफ वी डी सतीशन परवूर सीट से करीब 1,000 वोटों की मामूली बढ़त बनाए हुए हैं.
कांग्रेस के अंदर हो सकती है खींचतान
केरल में कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान इस बार थोड़ी अलग है. पहले मुकाबला सिर्फ राज्य के नेताओं तक सीमित रहता था, लेकिन अब के.सी. वेणुगोपाल जैसे हाईकमान के बड़े नेता के मैदान में आने से मामला और पेचीदा हो गया है. वेणुगोपाल कांग्रेस के महासचिव हैं और उन्हें राहुल गांधी का करीबी बताया जाता है.
कांग्रेस की बढ़ेगी टेंशन
पहले जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में होती थी, तब ऐसे हालात को संभालना आसान होता था. पार्टी का हाईकमान बड़े नेताओं को केंद्र सरकार में अहम पद देकर उनकी नाराजगी दूर कर देता था. जैसे 1995 में के. करुणाकरण को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा तो उन्हें केंद्र में मंत्री बना दिया गया, और ए. के. एंटनी को सीएम बनाया गया.
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इसी तरह 2004 में एंटनी के इस्तीफे के बाद ओमन चांडी को मुख्यमंत्री बनाया गया और एंटनी को यूपीए सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली. लेकिन अब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में नहीं है, इसलिए केरल में मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई और ज्यादा अहम और दिलचस्प हो गई है, क्योंकि नेताओं को संतुष्ट करने के विकल्प सीमित हो गए हैं.
