Kartavya Path: 28 फीट ऊंची है नेताजी की प्रतिमा, तैयार करने में लग गये 26000 घंटे, जानें इसकी खासियत

होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर किया गया था. प्रतिमा का अनावरण आजाद हिंद फौज के पारंपरिक गीत कदम, कदम बढ़ाए जा की धुन के साथ किया गया. एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को प्रदर्शित करने के लिए देश के कोने-कोने से आए 500 नर्तकों को बुलाया गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया गेट के पास स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्‍य प्रतिमा का अनावरण किया. बोस की प्रतिमा उसी स्थान पर स्थापित की गई है, जहां इस साल की शुरुआत में पराक्रम दिवस (23 जनवरी) के अवसर पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था.

इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर किया गया था. प्रतिमा का अनावरण आजाद हिंद फौज के पारंपरिक गीत कदम, कदम बढ़ाए जा की धुन के साथ किया गया. एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को प्रदर्शित करने के लिए देश के कोने-कोने से आए 500 नर्तकों द्वारा एक सांस्‍कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को इंडिया गेट के समीप छतरी के नीचे रखी गयी है. अखंड ग्रेनाइट को तराश कर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को बनाया गया. 28 फीट है काले रंग के ग्रेनाइट पत्‍थर से निर्मित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा.

मूर्तिकार नरेश जी कुमावत ने सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का मॉडल बनाया. उन्होंने कई तरह के मॉडल तैयार किये थे, जिसमें इसे सेलेक्ट किया गया. सुषाभ चंद्र बोस की मूर्ति का वजन 65 मीट्रिक टन है.

30 से 40 कुशल कारिगरों ने सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति को तैयार किया. सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति को तैयार करने में 5 महीने से अधिक का समय लगा. नेताजी की प्रतिमा को पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक औजारों का उपयोग कर पूरी तरह हाथों से बनाया गया है.

करीब 26,000 घंटे के अथक कलात्‍मक प्रयासों से सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को किया गया तैयार. अरुण योगीराज के नेतृत्‍व में मूर्तिकारों के एक दल ने यह प्रतिमा तैयार की है. यह प्रतिमा भारत की विशालतम, सजीव, अखंड पत्‍थर पर हस्त निर्मित प्रतिमाओं में से एक है.

ग्रेनाइट के इस अखंड पत्‍थर को तेलंगाना के खम्‍मम से 1665 किलोमीटर दूर नयी दिल्‍ली तक लाने के लिए 100 फुट लंबा 140 पहियों वाला एक ट्रक विशेष तौर पर तैयार किया गया था.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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