कर्नाटक चुनाव : ‘नहीं का मतलब नहीं’, कांग्रेस के साथ समझौते पर बोले जेडीएस नेता एच डी देवेगौड़ा

2018 में हम कांग्रेस के साथ सरकार बनाना बिल्कुल नहीं चाहते थे. लेकिन कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और गुलाम नबी आज़ाद उस वक्त मेरे घर पहुंचे और गठबंधन करने पर बातचीत हुई. अंत में दोनों पार्टियों के बीच बात बन गयी. जानें क्या बोले जेडीएस नेता एच डी देवेगौड़ा

जनता दल (सेक्युलर) के संरक्षक और देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की ओर से कांग्रेस को लेकर बयान दिया गया है. उन्होंने 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के साथ कोई बातचीत से इनकार किया है. 89 वर्षीय गौड़ा से हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में जब कांग्रेस के साथ समझौते की बात की गयी तो उन्होंने कहा कि बेवजह अपना सिर खुजलाने की कोशिश मत करो… नहीं… नहीं का मतलब नहीं होता है. यानी नो मिन्स नो…

पूर्ण बहुमत (2013) प्राप्त करने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री बनने वाले सिद्धारमैया के बारे में जब देवेगौड़ा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे दिन लद गये हैं. आपको बता दें कि कर्नाटक में त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे आगे दिख रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री पद के लिए माथापच्ची करनी पड़ सकती है. यहां सिद्धारमैया और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर तल्खी देखने को मिल सकती है.

वोक्कालिगा और लिंगायत वोट है महत्वपूर्ण

यहां चर्चा कर दें कि गौड़ा और शिवकुमार दोनों वोक्कालिगा हैं, जो कर्नाटक की आबादी का 15% हिस्सा हैं. वोक्कालिगा और लिंगायत (17%) राज्य के दो प्रभावशाली समुदाय हैं जिन्होंने दशकों से राज्य की राजनीति पर अपना दबदबा कायम रखा है. यदि आपको याद हो तो लिंगायत 1990 के दशक में कांग्रेस से दूर चले गये थे और भाजपा पर भरोसा जताया था. वहीं वोक्कालिगा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जद (एस) के साथ हो लिया था.

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कांग्रेस ने दिया धोखा

साक्षात्कार में गौड़ा ने कहा कि लगातार खंडित जनादेश के कारण कर्नाटक में सरकार बनाने की चाबी जद (एस) के पास रही. 2018 में हम कांग्रेस के साथ सरकार बनाना बिल्कुल नहीं चाहते थे. लेकिन कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और गुलाम नबी आज़ाद उस वक्त मेरे घर पहुंचे और गठबंधन करने पर बातचीत हुई. अंत में दोनों पार्टियों के बीच बात बन गयी और प्रदेश में हमारी सरकार बनी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ लोगों ने आखिरकार उन्हें धोखा दिया. यही वजह है कि भाजपा आज सत्ता में है.

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By Amitabh kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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