कर्नाटक विधानसभा चुनाव : एक दूसरे का मजाक उड़ाने में व्यस्त कांग्रेस-भाजपा, टिकट को लेकर दुविधा बरकरार

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उनके कई वरिष्ठ नेता सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए अपनी सीट बदलना चाहते हैं. यहां तक कि मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी अपनी सीट बदलना चाहते हैं.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां रेस में हैं. प्रत्याशियों की सूची जारी हो रही है और सभी पार्टियां उम्मीदवारों को लुभाने के फिराक में हैं. इन सबके बीच जो जिस बात की चर्चा सबसे अधिक हो रही है वो है भाजपा और कांग्रेस के बीच तनातनी की. दोनों पार्टियां में टिकट बंटवारे को लेकर जो आंतरिक कलह व्याप्त है, उसे लेकर दोनों पार्टियां एक-दूसरे का मजाक बना रही हैं.

भाजपा ने अबतक जारी नहीं की प्रत्याशियों की सूची

ज्ञात हो कि कांग्रेस ने अबतक 166 सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि भाजपा संभवत: कल अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेगी. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस स्थिति पर भाजपा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए अपनी सीट बदलना चाहते हैं. यहां तक कि मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी अपनी सीट बदलना चाहते हैं.

कांग्रेस-भाजपा के बीच पलटवार का दौर जारी

सुरजेवाला के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने ट्वीट किया कि कांग्रेस अपने घर को देखे जहां पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सीट अबतक फाइनल नहीं हो पायी है. अपने ट्वीट में लहर सिंह सिरोया ने सुरजेवाला से सवाल किया है कि क्या आप बतायेंगे कि सिद्धारमैया बादामी और चामुंडेश्वरी सीट से क्यों भाग रहे हैं. वे आपके इतने बड़े नेता हैं, फिर उनका सीट अबतक तय क्यों नहीं हो पाया है.

सिद्धारमैया की सीट को लेकर दुविधा

ज्ञात हो कि कांग्रेस के लिए सिद्धारमैया के लिए सीट तय करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि वे अपने लिए दूसरी सीट की मांग कर रहे हैं, ऐसी जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आयी है. पहले सिद्धारमैया ने कहा था कि वे कोलार सीट से चुनाव लड़ेंगे बाद में उन्होंने वरुणा सीट से चुनाव लड़ने की बात कही. अभी भी उनकी सीट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

गौरव भाटिया ने राहुल गांधी से पूछा सवाल

भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि ये कहते हैं कि अगर कोई कांग्रेस का समर्थन करता है तो यह लोकतंत्र के हित में है, लेकिन अगर कोई भाजपा का समर्थन करता है तो वो है जांच एजेंसियों का डर है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि बीजेपी को चुनाव प्रचार के लिए बाहर के लोगों की जरूरत है, इसपर मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान स्वरा भास्कर जैसे लोगों समर्थन उन्हें क्यों लेना पड़ा. गौरतलब है कि कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं, जिसपर कांग्रेस ने मजाक बनाया था.

10 मई को होना है मतदान

आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश की प्रमुख पार्टियां कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेगी. टिकट पाने के लिए प्रत्याशियों में जोड़-तोड़ जारी है. सभी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. ज्ञात हो कि कर्नाटक में 10 मई को मतदान होना है, जबकि परिणाम 13 मई को घोषित होगा. 20 अप्रैल तक प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करना है. विधानसभा का कार्यकाल 24 मई को पूरा हो रहा है. कुल 224 सीटें विधानसभा में हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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