The Kerala Story फिल्म के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, रिलीज रोकने की मांग

सुदीप्तो सेन फिल्म के डायरेक्टर हैं. यह फिल्म 5 मई को रिलीज हो रही है. लेकिन फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में आ गयी है. फिल्म के डायरेक्टर का कहना है कि यह फिल्म आईएसआईएस आतंकवादी संगठन के खिलाफ है

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ‘दि केरला स्टोरी’ फिल्म के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की है कि वह थियेटर और ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर फिल्म के रिलीज को रोक दे. जमीयत उलेमा ए हिंद का कहना है कि यह फिल्म नफरत फैलाने वाली है और यह फिल्म विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी फैलाने का काम करती नजर आ रही है.

5 मई को रिलीज हो रही है फिल्म

गौरतलब है कि सुदीप्तो सेन फिल्म के डायरेक्टर हैं. यह फिल्म 5 मई को रिलीज हो रही है. लेकिन फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में आ गयी है. फिल्म के डायरेक्टर का कहना है कि यह फिल्म आईएसआईएस आतंकवादी संगठन के खिलाफ है, जो केरल की मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें आतंकवाद की ओर ढकेल रहा है.


संघ के विचारों को बढ़ावा देने वाली फिल्म

वहीं दि केरला स्टोरी मूवी का विरोध केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी किया है. उनका कहना है कि यह फिल्म संघ के विचारों को बढ़ावा दे रही है. बेवजह लव जिहाद के मुद्दे पर फिल्म बनाकर संघ के विचारों को प्रचारित किया जा रहा है. फिल्म का कई राजनीतिक दलों ने भी विरोध किया है, जिसके बाद सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कई सीन और डायलाॅग हटा दिये हैं. फिल्म में मुख्य भूमिका अदा शर्मा ने निभाई है.

फिल्म राज्य के नहीं आतंकवाद के खिलाफ

वहीं फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन का कहना है कि मैंने केरल राज्य के खिलाफ कोई फिल्म नहीं बनायी बल्कि आतंकवाद के खिलाफ फिल्म बनायी है. यह फिल्म सच्चाई बयां कर रही है, बेबस लड़कियों का दर्द इसमें फिल्माया गया है, इसलिए इस फिल्म को देखा जाना चाहिए.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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