Operation Ajay : हम सो रहे थे तभी एक सायरन बजा और..., जानें इजराइल से भारत लौटे लोगों ने क्या कहा

Operation Ajay : मैं वहां पर बतौर पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत था, मेरा पत्नी और 4 वर्ष की बेटी भी मेरे साथ हैं. तेल अवीव में स्थित भारतीय दूतावास का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने काफी सहयोग किया. इजराइल से भारत लौटे मनोज कुमार ने कहा

Operation Ajay : फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के साथ इजराइल के युद्ध के बीच देश छोड़ने के इच्छुक 212 भारतीयों को लेकर पहली चार्टर उड़ान गुरुवार को बेन गुरियन हवाई अड्डे से रवाना हुई जो शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंची. इजराइल से 212 भारतीय नागरिकों को लेकर पहली उड़ान दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी तो केंद्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने एयरपोर्ट पर वतन वापसी करने वालों का स्वागत किया. केंद्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि हमारी सरकार किसी भी भारतीय को कभी पीछे नहीं छोड़ेगी. हमारी सरकार, प्रधानमंत्री उनकी सुरक्षा के लिए, उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, विदेश मंत्रालय की टीम, एयर इंडिया की इस उड़ान के चालक दल के आभारी हैं जिन्होंने इसे संभव बनाया, हमारे बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ घर वापस लाया और उनके प्रियजनों के पास वापस पहुंचाया. इजराइल से वापस भारत लौटे लोगों ने वहां के हालात के बारे में जानकारी साझा की.

जब सायरन बजता है तो बहुत डर लगता है

ऑपरेशन अजय के तहत इजरायल से भारत आई एक महिला स्वाति पटेल ने बताया कि यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है. वहां जब सायरन बजता है तो बहुत डर लगता है. सायरन बजने पर शेल्टर में जाना होता है. यहां हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जब भी सायरन बजता था तब हमें 1.5 मिनट में शेल्टर में जाना होता था.

पिछले 4-5 दिनों से वहां की स्थिति तनावपूर्ण

इजराइल से भारत आई सीमा बलसारा ने कहा कि मैं एयर इंडिया की ओर से तेल अवीव में एयरपोर्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत थी, मैं वहां पर पिछले 10 महीने से थी, वहां से हमें बाहर निकाला गया. पिछले 4-5 दिनों से वहां की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. हमने उस स्थिति का सामना किया और अब हम यहां हैं. मेरा परिवार भारत में ही रहता है, मैं वहां(तेल अवीव) रह रही थी. वहीं ऑपरेशन अजय के तहत इजरायल से भारत लाए गए एक भारतीय नागरिक ने कहा कि इज़रायल में युद्ध शुरू होने के बाद हमें भारत से हमारे परिवार और दोस्तों के फोन आने लगे थे, सभी हमारे लिए फिक्रमंद थे. मैं हमारे लिए इस ऑपरेशन के इज़रायल से भारत सुरक्षित लाए जाने पर भारत सरकार और भारत के विदेश मंत्रालय का शुक्रिया अदा करता हूं.

ऑपरेशन अजय के तहत इजरायल से भारत लाए गए मनोज कुमार ने कहा कि मैं वहां पर बतौर पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत था, मेरा पत्नी और 4 वर्ष की बेटी भी मेरे साथ हैं. तेल अवीव में स्थित भारतीय दूतावास का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने काफी सहयोग किया… इसके साथ ही सुरक्षित रूप से भारत आने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय का धन्यवाद करता हूं. इजरायल की सरकार भी दिन-रात काम कर रही है.


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हम सो रहे थे तभी एक सायरन बजा और…

ऑपरेशन अजय के तहत इजरायल से भारत आई एक महिला ने कहा कि मेरा बेटा अभी केवल 5 महीने का है, हम जिस स्थान पर थे वह सुरक्षित था लेकिन आगे की परिस्थिति और अपने बेटे के लिए हमने भारत आने का फैसला लिया. पहली रात हम सो रहे थे तभी एक सायरन बजा, हम वहां पर पिछले 2 वर्ष से थे हमने ऐसी परिस्थिति पहले कभी नहीं देखी थी. हम शेल्टर में गए, हम 2 घंटे के लिए शेल्टर में रहे. हम अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं, मैं भारत सरकार और प्रधानमंत्री का धन्यवाद करती हूं.


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पहली चार्टर उड़ान इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे से हुई थी रवाना

आपको बता दें कि फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के साथ इजराइल के युद्ध के बीच देश छोड़ने के इच्छुक 212 भारतीयों को लेकर पहली चार्टर उड़ान गुरुवार को बेन गुरियन हवाई अड्डे से रवाना हुई थी जो आज सुबह देश की राजधानी नई दिल्ली में उतरी. सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारतीय “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर स्थानीय समयानुसार रात 22:14 बजे भारत के लिए रवाना हुए.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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