Israel Hamas War: इजराइल ने हमले से किया इनकार, अस्पताल के बाहर बिखरे हैं शव, टेंशन बढ़ा

Israel Hamas War- फिलिस्तीनी अधिकारियों ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार 7 अक्टूबर से अब तक 11,078 गाजा के लोग मारे गये हैं. इनमें लगभग 40 प्रतिशत बच्चे हैं. इस बीच खबर है कि गाजा में अल-शिफा अस्पताल के पास इजरायली सैनिक हमास के आतंकियों को निशाना बना रहे हैं.

Israel Hamas War: इजराइल और हमास के बीच युद्ध का आज 37वां दिन है. आज भी आतंकियों पर इजराइली सेना उसी तरह से टरगेट कर रही है जैसाकि पहले दिन कर रही थी. इस बीच गाजा से एक ऐसी खबर आ रही है जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. दरअसल, गाजा में अल-शिफा अस्पताल के पास इजरायली सैनिक हमास के आतंकियों को निशाना बना रहे हैं. अस्पताल के बारे में बताया जा रहा है कि यह पहले से ही दवाओं और ईंधन की कमी से जूझ रहा है. अस्पताल उन सैकड़ों लोगों को आश्रय प्रदान कर रहा है जो युद्ध में घायल हुए हैं या विस्थापित होकर वहां पहुंचे हैं उनको शरण दिये हुए है. आइए आपको बताते हैं इससे जुड़ी खास बातें…

इजराइल ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया है जिसमें कहा गया है कि गाजा पट्टी के सबसे बड़े अस्पताल पर गोलीबारी उनकी ओर से की गई है, लेकिन कहा कि उनके सैनिक अल-शिफ़ा के पास हमास के आतंकियों से लड़ रहे हैं.

-सेना के प्रवक्ता डैनियल हगारी का बयान सामने आया है. उन्होंने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि एक झूठी खबर फैलाई जा रही है. इस खबर में कहा जा रहा है कि इजराइली सेना अल-शिफ़ा अस्पताल को घेर रही है और उसपर हमला कर रही है. यह खबर झूठ है.

-इजराइल की ओर से बयान तब आया है जब फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दावा किया कि अस्पताल में दो नवजात बच्चों की मौत हो गई है और बिजली की कमी के कारण इनक्यूबेटरों में दर्जनों अन्य मरीज खतरे में हैं. आसपास जंग तेज हो गई है.

-सहायता एजेंसियों और अस्पताल के कर्मचारियों ने जो ताजा हालात को लेकर जानकारी दी है उसके अनुसार, स्थिति पहले से ही विनाशकारी है क्योंकि दवाओं और ईंधन की भारी कमी से अस्पताल जूझ रहा है. जो खबर मीडिया में अल-शिफा के डॉक्टरों के हवाले से चल रही है उसके अनुसार, अस्पताल को घेर लिया गया है, बाहर फैले हुए शवों और घायल लोगों को लाने का कोई विकल्प नहीं है. अस्पताल के अंदर या बाहर कोई आवाजाही नहीं हो पा रही है.

-मौजूदा स्थिति के बारे में अस्पताल के एक व्यक्ति ने एएफपी को जानकारी दी. उसने बताया कि गोलीबारी लगातार जारी है. यह रुकने का नाम नहीं ले रही है. हवाई हमले में भी कमी नहीं हो रही है. परिसर के आसपास दर्जनों शव बिखरे पड़े हैं. इनके पास जाना भी मुश्किल है.

इजराइल की ओर से कहा गया है कि गाजा से दक्षिणी इजराइल में रॉकेट अभी भी दागे जा रहे हैं. इसी ओर से पिछले महीने हमले किये गये थे जिसमें हमास द्वारा लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया था.

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-फिलिस्तीनी अधिकारियों ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार 7 अक्टूबर से अब तक 11,078 गाजा के लोग मारे गये हैं. इनमें लगभग 40 प्रतिशत बच्चे हैं.

-इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज से कहा कि उनके देश की गाजा पर दोबारा कब्जा करने की कोई योजना नहीं है. हम गाजा पर शासन नहीं करना चाहते हैं. हम इस पर कब्जा नहीं करना चाहते, बल्कि हम इसे और हमें एक बेहतर भविष्य देना चाहते हैं.

-इजराइल और हमास के बीच जारी युद्ध से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है. इससे इजरायली सेना और लेबनान के हिजबुल्लाह के बीच टशन बढ़ गया है. सऊदी अरब में बैठक कर अरब देशों ने इजराइल के आत्मरक्षा की बात को खारिज किया है. अरब देशों ने गाजा में सैन्य अभियान तत्काल बंद करने का आह्वान किया.

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-आपको बता दें कि युद्ध के कारण दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं. शनिवार को कम से कम 300,000 फ़िलिस्तीनी समर्थक प्रदर्शनकारियों ने लंदन में मार्च किया. ब्रुसेल्स में फिलिस्तीन समर्थक रैली में 20,000 से अधिक लोग शामिल हुए.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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