इंटरनेट बंद, मेट्रो बंद...फिर भी नहीं टूटी छात्रों की डिजिटल चेन; जंतर-मंतर प्रदर्शन में Gen-Z का नया हथियार बना बिटचैट

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में इस बार सिर्फ नारों और पोस्टरों की नहीं, बल्कि तकनीक की भी बड़ी लड़ाई देखने को मिली.

नयी दिल्ली से संदीप सावर्ण की रिपोर्ट

आंदोलन के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से आसपास के इलाके में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगायी, कई मेट्रो स्टेशनों का संचालन प्रभावित हुआ और अलग-अलग रास्तों पर बैरिकेडिंग कर भीड़ की आवाजाही सीमित करने की कोशिश की गयी, मकसद साफ था. बड़ी भीड़ के बीच संचार और समन्वय को मुश्किल बनाना. लेकिन जेन-जी ने इसका भी रास्ता खोज लिया.

ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप ने छात्र आंदोलन को दी हवा

इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के बीच बिटचैट नाम का ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप तेजी से चर्चा में आ गया. कई छात्र इसे डाउनलोड कर एक-दूसरे तक संदेश पहुंचाते रहे. आंदोलन के दौरान कई युवाओं के मोबाइल में यह ऐप खुला दिखाई दिया और इसकी मदद से बिना इंटरनेट के लोकेशन, जरूरी सूचना और समूहों के बीच संदेश साझा किये गये.

क्या है बिट चैट की खासियत

बिटचैट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए न इंटरनेट चाहिए, न मोबाइल नेटवर्क और न ही किसी अकाउंट या फोन नंबर की जरूरत होती है. यह ब्लूटुथ मेश टेक्नोलॉजी पर काम करता है. यानी एक मोबाइल दूसरे मोबाइल तक संदेश पहुंचाता है और वही फोन आगे तीसरे फोन तक संदेश भेज देता है. इस तरह हर स्मार्टफोन एक छोटे रिले स्टेशन की तरह काम करता है और संदेश भीड़ के बीच धीरे-धीरे आगे बढ़ता जाता है. ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने का दावा किया जाता है, जिससे संदेश सुरक्षित रहते हैं.

"ऐसी तकनीकें नयी नहीं हैं, लेकिन बड़े जनसमूह में इनका उपयोग अब तेजी से बढ़ रहा है. इंटरनेट बंद होने, नेटवर्क फेल होने, प्राकृतिक आपदा, ट्रैकिंग और बड़े आयोजनों में इन्हें उपयोगी माना जाता है. यही कारण है कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भी इस ऐप की चर्चा अचानक बढ़ गयी." - तकनीकी विशेषज्ञ हरीश कुमार

ऑफलाइन ऐप ने छोटी-छोटी टीमों के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद की

आंदोलन में शामिल छात्रों ने बताया कि इंटरनेट बंद होने के बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म बेअसर हो गये थे. ऐसे में बिटचैट जैसे ऑफलाइन ऐप ने छोटी-छोटी टीमों के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद की. हालांकि इसकी प्रभावी दूरी ब्लूटुथ की सीमा पर निर्भर करती है और यह तभी बेहतर काम करता है, जब आसपास पर्याप्त संख्या में ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोग मौजूद हों. जंतर-मंतर में इसके इस्तेमाल की खबरें सामने आने के बाद इस तकनीक को लेकर सरकारी एजेंसियों की भी दिलचस्पी बढ़ी. कुछ रिपोर्टों में दुरुपयोग की आशंकाओं के मद्देनजर इसके कुछ ऑनलाइन स्रोतों (रिपॉजिटरी) पर कार्रवाई की चर्चा भी सामने आयी.

नई पीढ़ी के लिए संवाद का रास्ता बंद करना आसान नहीं : आयुषी सिंघल

प्रदर्शन में शामिल आयुषी सिंघल ने कहा कि जंतर-मंतर का आंदोलन यह भी दिखाकर गया कि आज का युवा केवल सड़कों पर प्रदर्शन करना नहीं जानता, बल्कि तकनीक का इस्तेमाल कर परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी जानता है. इंटरनेट बंद हो सकता है, मोबाइल नेटवर्क ठप हो सकता है, लेकिन नई पीढ़ी के लिए संवाद का रास्ता बंद करना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है. यही इस आंदोलन की सबसे अलग और सबसे आधुनिक तस्वीर बनकर सामने आयी.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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