इंडियन आर्मी के दुश्मनों का दूर से ही होगा सफाया, इस टेक्निक से लैस होगी भारतीय सैनिकों की इजरायली मशीन गन

Indian Army Negev Machine Gun: भारतीय सेना ने अपनी नेगेव मशीन गनों के लिए एमईपीआरओ एक्स6 टेलीस्कोपिक साइट को चुना है. यह अत्याधुनिक ऑप्टिकल सिस्टम लंबी दूरी पर लक्ष्य पहचान और सटीक निशाना लगाने में मदद करेगा. परियोजना के तहत भारत में ही निर्माण होगा, जिससे मेक इन इंडिया को भी मजबूती मिलेगी.

Indian Army Negev Machine Gun: भारतीय सेना ने अपनी नेगेव मशीन गनों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक अहम फैसला लिया है. सेना ने विस्तृत परीक्षण और कई वर्षों तक चली चयन प्रक्रिया के बाद एमईपीआरओलाइट की एमईपीआरओ एक्स6 टेलीस्कोपिक साइट को नेगेव मशीन गनों के लिए आधिकारिक डे-ऑप्टिक (दिन के समय इस्तेमाल होने वाली दृष्टि प्रणाली) के रूप में चुना है. इस नई तकनीक से सैनिकों को लंबी दूरी पर लक्ष्य पहचानने और सटीक तरीके से निशाना साधने में मदद मिलेगी.

भारतीय सेना बड़ी संख्या में नेगेव मशीन गनों की खरीद कर रही है. इसके साथ सेना को ऐसे आधुनिक ऑप्टिकल सिस्टम की जरूरत थी जो लंबी दूरी पर ऑपरेशन की प्रभावशीलता बढ़ा सके. इसके लिए सेना ने कई चरणों में यूजर रेंटिंग, फील्ड ट्रायल और कठिन पर्यावरणीय परीक्षण किए. इन परीक्षणों में विश्वसनीयता, मजबूती, सटीकता और कठिन परिस्थितियों में संचालन क्षमता जैसे मानकों को परखा गया. इन सभी कसौटियों पर एमईपीआरओ एक्स6 खरा उतरा और उसे चुना गया.

क्या है MEPRO X6 की खासियत?

एमईपीआरओ एक्स6 एक फिक्स्ड 6x मैग्निफिकेशन वाली टेलीस्कोपिक साइट है, जिसे असॉल्ट राइफल, लाइट मशीन गन और अन्य हथियार प्रणालियों के लिए विकसित किया गया है. इसमें

  • लंबी दूरी पर लक्ष्य की बेहतर पहचान
  • तेज और सटीक टारगेट एक्विजिशन
  • चौड़ा फील्ड ऑफ व्यू
  • कठिन मौसम और युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों में भरोसेमंद प्रदर्शन
  • मजबूत और टिकाऊ डिजाइन

41000 नेगेव मशीनगन खरीद रही है भारतीय सेना

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑप्टिकल साइट भारतीय सेना की 7.62 मिमी नेगेव लाइट मशीन गनों पर लगाई जाएगी, जो फिलहाल विभिन्न पैदल सेना इकाइयों में तैनात हैं. सेना पहले ही इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज (आईडब्ल्यूआई) से 41 हजार नेगेव मशीन गनों की खरीद का ऑर्डर दे चुकी है, जिनका निर्माण भारत में पीएलआर सिस्टम्स के जरिए किया जा रहा है.

BEL और RRP Defence निभाएंगे अहम भूमिका

इस परियोजना के तहत ऑप्टिकल साइट्स की आपूर्ति भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के जरिए की जाएगी. BEL ने एमईपीआरओ एक्स6 आधारित समाधान के साथ यह टेंडर हासिल किया है और वह भारतीय सेना के लिए मुख्य ठेकेदार की भूमिका निभाएगी.

वहीं, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और मेक इन इंडिया अभियान को मजबूत करने के लिए एमईपीआरओलाइट ने आरआरपी डिफेंस के साथ व्यापक ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी समझौता किया है.

इस समझौते के तहत एमईपीआरओलाइट भारत में एमईपीआरओ एक्स6 के पूर्ण निर्माण के लिए जरूरी तकनीकी, उत्पादन प्रक्रियाएं और निर्माण क्षमता उपलब्ध कराएगी. आरआरपी डिफेंस भारत में ही इन साइट्स का निर्माण कर उन्हें BEL को उपलब्ध कराएगी.

मेक इन इंडिया को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इस कार्यक्रम को भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तकनीक हस्तांतरण के जरिए देश में उन्नत रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी. एमईपीआरओलाइट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोलान कालिमी ने कहा, ‘भविष्य की सैन्य क्षमता केवल हथियारों और प्लेटफॉर्म से तय नहीं होगी, बल्कि उस जानकारी की गुणवत्ता से भी तय होगी जो निर्णय लेने के समय सैनिक के पास उपलब्ध होती है. हमारा लक्ष्य ऐसे ऑप्टिकल समाधान उपलब्ध कराना है जो युद्धक्षेत्र की जानकारी को सामरिक बढ़त में बदल सकें.’

उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय सेना द्वारा एमईपीआरओ एक्स6 का चयन हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. तकनीक हस्तांतरण साझेदारी के माध्यम से हम न केवल उन्नत सैन्य क्षमता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक विकास में भी योगदान दे रहे हैं.’

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भारतीय सेना को मिलेगा लाभ

एमईपीआरओलाइट लंबे समय से दुनिया भर की सेनाओं और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक ऑप्टिकल सिस्टम उपलब्ध कराती रही है. कंपनी का कहना है कि यह परियोजना भारत में उसकी मौजूदगी को और मजबूत करेगी.

कंपनी के अनुसार, एमईपीआरओलाइट, BEL और आरआरपी डिफेंस के संयुक्त प्रयासों से भारतीय सेना को उच्च गुणवत्ता वाले सिस्टम, दीर्घकालिक तकनीकी सहायता और लंबे समय तक बेहतर परिचालन क्षमता सुनिश्चित की जा सकेगी.

भारतीय सेना के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

आधुनिक युद्ध में केवल हथियार ही नहीं, बल्कि लक्ष्य की पहचान और सटीक निशाना लगाने वाली तकनीक भी निर्णायक भूमिका निभाती है. एमईपीआरओ एक्स6 जैसी उन्नत ऑप्टिकल साइट के शामिल होने से भारतीय सेना की नेगेव मशीन गनों की प्रभावशीलता बढ़ेगी और सैनिकों को युद्धक्षेत्र में अधिक सामरिक बढ़त हासिल होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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