Nepal Flood : नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में 26 अगस्त को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने भारी तबाही मचाई है. नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,411 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5,875 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. वहीं तिब्बत के हिस्से में भी 43 लोगों की मौत हुई है और 500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. बुनियादी ढांचे के ध्वस्त होने से नेपाल के कई इलाके पूरी तरह कट गए हैं.
संकट में सबसे पहले पहुंचा भारत, 54 एक्सपर्ट्स भी तैनात
मुसीबत की इस घड़ी में भारत ने अपने 'नेबरहुड फर्स्ट' और आपदा में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले 'फर्स्ट रेस्पॉन्डर' की भूमिका को साबित किया है. हिंदुस्तान टाइम्स (HT) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले 25 दिनों के भीतर कुल 141.5 टन जरूरी राहत सामग्री और उपकरण नेपाल पहुंचाए हैं.
सामग्री के अलावा, भारत ने ग्राउंड जीरो पर बचाव और पुनर्निर्माण कार्य के लिए 54 विशेष ट्रेंड कर्मियों को भी भेजा है. इनमें भारतीय सेना की टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल यूनिट्स, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और इमरजेंसी कंट्रोल टीमें शामिल हैं, जो मलबे में दबे लोगों को निकालने और शवों की पहचान में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही हैं.
अगस्त से सितंबर तक भारत की मदद की टाइमलाइन
आपदा के पहले ही दिन से भारत की वायुसेना और लॉजिस्टिक्स विंग ने राहत की खेप भेजनी शुरू कर दी थी:
26-27 अगस्त: शुरुआती दो दिनों में 47.5 टन राहत सामग्री तुरंत काठमांडू पहुंचाई गई.
28-29 अगस्त: 14 टन राहत सामग्री के साथ टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल स्टाफ और 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम रवाना हुई.
2-8 सितंबर: लगातार उड़ानों के जरिए करीब 62 टन अतिरिक्त राशन, दवाइयां और टेंट भेजे गए.
19 सितंबर: 11 टन राहत सामग्री की ताजा खेप के साथ कुल सहायता 141.5 टन पर पहुंच गई.
वैश्विक स्तर पर भी नेपाल को मिल रही आर्थिक मदद
भारत के अलावा दुनिया के कई अन्य देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी नेपाल की सहायता के लिए आगे आए हैं. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के साथ-साथ वर्ल्ड बैंक, यूरोपियन यूनियन, एशियन डेवलपमेंट बैंक और रेड क्रॉस ने राहत फंड का ऐलान किया है. इसके अलावा निजी कंपनियों ने भी बड़ी मदद दी है, जिसमें टेक कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने 10 मिलियन डॉलर (करीब 83 करोड़ रुपये) और दक्षिण कोरिया के डूसन ग्रुप ने 5 मिलियन डॉलर दान किए हैं.
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