संसद मार्ग पर अचानक भड़की हिंसा
22 जुलाई की रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया. पार्क होटल के पास जमा प्रदर्शनकारी अचानक उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. कनॉट प्लेस की मुख्य सड़कों पर भीड़ ने पुलिसकर्मियों को खदेड़ना शुरू कर दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
पुलिस की बस पर चढ़कर शांति की अपील
बवाल को बढ़ता देख पुलिस ने CJP के ही वॉलंटियर्स की मदद ली. लाउडस्पीकर लगी एक पुलिस बस के ऊपर वॉलंटियर को बैठाया गया, जो लगातार संसद मार्ग पर घूमकर लोगों से शांत रहने की अपील कर रहा था. वॉलंटियर्स ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि हिंसा और पथराव से उनका पूरा आंदोलन खराब हो जाएगा.
पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस का धुआं
भीड़ को बेकाबू होता देख तैनात सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला. पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. इस झड़प में दो एसीपी (ACP), एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल समेत कुल 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए.
सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी और भारी सुरक्षाबल
आंदोलनकारियों से पथराव और नारेबाजी बंद करने को कहा गया, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गए. स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लेने के लिए भारी मात्रा में पुलिस और दंगा रोधी वाहनों (Riot Control Vehicles) को तैनात कर दिया गया. जंतर-मंतर से संसद मार्ग जाने वाले रास्ते को पूरी तरह बैरिकेड्स से सील कर दिया गया.
मध्य दिल्ली में इंटरनेट बंद और पसरा सन्नाटा
हिंसा और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया. सरकारी आदेशों के बाद जंतर-मंतर और आसपास के मध्य दिल्ली के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया. यूज़र्स के फोन पर सेवा बंद होने के मैसेज आने लगे और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात रहा.
