IIT में 5 साल में 53 की मौत, साहिल की मौत पर बवाल के बीच SC-ST OBC छात्रों को लेकर आया ये आंकड़ा

IIT में छात्रों की मौत से जुड़ा आंकड़ा सामने आया है. 5 साल के दौरान कुल 53 छात्रों की मौत हुई, जिनमें 45 आत्महत्या और 8 अप्राकृतिक मौत के मामले हैं. अब सामने आए आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि SC, ST और OBC वर्ग से कितने छात्रों की मौत हुई. नीचे देखें पूरा आंकड़ा.

IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के छात्र साहिल वाकोडे हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे.  बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की मौत के बाद आक्रोशित छात्रों ने IIT परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने साहिल की मौत के पीछे जातिगत उत्पीड़न को वजह बताया. मुंबई पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अब देश के शिक्षण संस्थानों में जातीय आधार पर उत्पीड़न और आत्महत्या की घटनाओं पर नई बहस छिड़ गई है. SC-ST और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों की गूंज संसद में भी सुनाई देती रही है. साल 2024 में इसे लेकर सांसद एंटो एंटनी ने लोकसभा में सवाल भी पूछा था.

सांसद एंटो एंटनी ने किया था ये सवाल

लोकसभा में सांसद एंटो एंटनी ने 25 नवंबर 2024 को शिक्षा मंत्री से IIT में छात्रों की आत्महत्या को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने जानना चाहा कि पिछले पांच साल में हर IIT में कितने छात्रों ने आत्महत्या की, इनमें SC, ST और OBC वर्ग के कितने छात्र थे और इनका साल और संस्थान के हिसाब से आंकड़ा क्या है. साथ ही, सरकार से यह भी पूछा गया कि IIT में आत्महत्या रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और हर IIT में इस समय कितने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ काम कर रहे हैं. उस वक्त शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि आत्महत्या से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर जुटाता है. छात्रों की आत्महत्या से जुड़े 2022 के आंकड़े NCRB की ‘Accidental Deaths & Suicide in India (ADSI) 2022’ रिपोर्ट में उपलब्ध हैं.


ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या केस, डीन सूर्यनारायण डूला सस्पेंड

सवाल से संबंधित कागजात देखने के लिए यहां क्लिक करें.

वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में IIT में छात्रों की मौत से जुड़ा आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के अलग-अलग IIT में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई. इनमें आधे से ज्यादा छात्र SC, ST और OBC वर्ग से थे. इन 53 मामलों में 45 आत्महत्या और 8 अप्राकृतिक मौत के मामले शामिल हैं.

IIT छात्रों की मौत का डेटा संसद में नहीं हुआ पेश

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी नीलेश चंद्र श्रीवास्तव ने 1 दिसंबर 2025 को सभी IIT को पत्र भेजकर छात्रों की आत्महत्या से जुड़ी जानकारी मांगी थी. यह जानकारी लोकसभा में पूछे जाने वाले एक सवाल के जवाब के लिए मांगी गई थी. इस सवाल का डायरी नंबर 3682 था और इसे 8 दिसंबर 2025 को पेश किया जाना था. मंत्रालय को सभी IIT से जानकारी मिल गई थी, लेकिन यह आंकड़ा संसद में पेश नहीं किया गया. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने 8 दिसंबर को IIT और दूसरे केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े सवाल पूछे थे.


ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम क्यों आया? जानें कौन हैं

IIT में छात्रों की मौत के आंकड़े बढ़े

IIT की ओर से शिक्षा मंत्रालय को दी गई जानकारी के मुताबिक, देश के इन बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की मौत के मामले बढ़े हैं. 2020-21 में 5 छात्रों की मौत हुई थी. 2021-22 और 2022-23 में यह संख्या 6-6 रही. इसके बाद 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 छात्रों की मौत दर्ज की गई. कुल मौतों में 84.9 फीसदी मामले आत्महत्या के थे. वहीं, 2024-25 में 19 मौतों में से 6 को अप्राकृतिक मौत की श्रेणी में रखा गया. इन 53 मौतों में सबसे ज्यादा 23 छात्र जनरल कैटेगरी से थे, जो कुल मामलों का 43.4 फीसदी है. इसके बाद OBC वर्ग के 12 छात्र (22.6 फीसदी), SC वर्ग के 10 छात्र (18.9 फीसदी), ST वर्ग के 7 छात्र (13.2 फीसदी) और EWS वर्ग का 1 छात्र (1.9 फीसदी) शामिल था. यानी SC, ST और OBC वर्ग को मिलाकर कुल 29 छात्रों की मौत हुई, जो सभी मामलों का 54.7 फीसदी है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : amitabh.kumar@prabhatkhabar.in

ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >