Bomb Threats in Delhi : इस्लामिक स्टेट से जुड़े तार, इस ईमेल आई से मिली धमकी- sawariim@mail.ru.

Bomb Threats in Delhi : बुधवार सुबह बम की धमकी मिलने केे बाद गृहमंत्रालय ने सोशल मीडिया में पोस्ट लिखकर इसे डराने वाली झूठी कार्रवाई बताया.

Bomb Threats in Delhi : दिल्ली के 80 स्कूल को आज ईमेल करके बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल आईडी की जानकारी मिल गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह बताया है कि मेल sawariim@mail.ru. से आया है. Sawariim शब्द अरबी का है, जिसका अर्थ तलवारों का टकराना होता है. इस शब्द का प्रयोग आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट 2014 से ही इस्लामिक प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए करता रहा है. ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले की जांच कर रही है.

बम की धमकी दहशत फैलाने के लिए दी गई : गृह मंत्रालय

इससे पहले दिल्ली के स्कूलों में आज सुबह मेल करके दहशत फैलाने वाली घटना पर गृहमंत्रालय की ओर से बयान आया था. गृहमंत्रालय ने कहा कि जांच में यह में मेल झूठा पाया गया और यह सिर्फ दहशत फैलाने की कोशिश थी, इसलिए घबराने की जरूरत बिलकुल भी नहीं है. गृहमंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट लिखकर ये बातें कही गई है. मंत्रालय ने कहा कि बावजूद इसके सुरक्षा एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और जिस भी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता होगी वह किया जाएगा. धमकी की खबर फैलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन मुस्तैद हो गया था. दिल्ली के एलजी ने भी कई स्कूलों में खुद जाकर घटना के बारे में जानकारी ली और अभिभावकों से ना घबराने की अपील की.

अभिभावकों में दहशत

गौरतलब है कि आज सुबह दिल्ली एनसीआर के 80 से अधिक स्कूलों को ईमेल भेजकर उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी गई, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया और विद्यार्थियों के साथ ही अभिभावकों में भी दहशत फैल गई. अभिभावकों की जब सूचना मिली तो वे सब स्कूल की ओर भागे. हालांकि स्कूल प्रशासन ने भी अभिभावकों से परेशान ना होने की अपील की और बच्चों को जल्दी से जल्दी घर भिजवाने की व्यवस्था की.

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ईमेल की सूचना आते ही प्रशासन सतर्क

आज सुबह सबसे पहले दिल्ली के मयूर विहार इलाके में स्थित मदर मैरी स्कूल और द्वारका के दिल्ली पब्लिक स्कूल में बम होने की सूचना मिली, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया और तुरंत स्कूलों को खाली कराया गया और पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन जांच में बम की सूचना गलत साबित हुई. बम का पता लगाने वाली टीम, बम निरोधक दस्ता और दमकल सेवा के अधिकारियों ने काफी जांच की, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन तब तक बच्चों को वापस उनके घर भेज दिया गया. दिल्ली की मंत्री आतिशी ने भी एक्स पर पोस्ट कर अभिभावकों से ना घबराने की अपील की. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों को खाली करा दिया गया है, बच्चे सुरक्षित हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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