मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर क्या दिखाना चाहता है पाकिस्तान? भारत ने कहा- नौटंकी, आंखों में धूल झोंकने की कोशिश

पाकिस्तान द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये करने के ऐलान पर भारत ने इसे 'नौटंकी' और ढोंग करार दिया है.

जैश-ए-मोनौटंकी, आंखों में धूल झोंकने की कोशिश, जैश प्रमुख मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाने के पाकिस्तानी कदम पर भारत की प्रतिक्रियाहम्मद (JeM) के चीफ मसूद अजहर पर पाकिस्तान द्वारा इनाम की राशि 70 लाख रुपए करने के ऐलान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने टिप्पणी की है. प्रेस काॅन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की नौटंकी और लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिशें कोई नई बात नहीं है.

आंख में धूल झोंकने की कोशिश

रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने पहले भी ऐसी नौटंकी देखी हैं, ये सिर्फ और सिर्फ आंख में धूल झोंकने की कोशिश है. आतंकवाद को स्पॉन्सर करने वाले देश के लिए इस तरह की झूठी घोषणाएं करना महज ढोंग है. पाकिस्तान को ऐसी घोषणाएं करने के बजाय ठोस कार्रवाई करनी चाहिए ताकि विश्व को ऐसा लगे कि वह आतंकवाद के खिलाफ है.


इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया

रणधीर जायसवाल का यह बयान तब आया है जब पाकिस्तान की फेडरल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 2026 के लिए मोस्ट वांटेड आतंकियों की नयी रेड बुक जारी की. इस सूची में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का नाम भी शामिल है. FIA ने अजहर को भगोड़ा बताते हुए उस पर घोषित इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया है. इस सूची में 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं. अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक से पहले यह सूची जारी कर लाभ लेने की कोशिश कर रहा है.

जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मामला उठाते रहेंगे

जाकिर नाइक के मुद्दे पर MEA के प्रवक्ता ने कहा कि हम मलेशियाई पक्ष के साथ अलग-अलग लेवल पर इस मुद्दे को उठाते रहेंगे. गौरतलब है कि भारत जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, क्योंकि देश में उसके खिलाफ नफरत फैलाने का मामला दर्ज है.


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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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