National Youth Day: ये हैं भारत के पांच स्टार युवा नेता, जिसने कम उम्र में ही दिग्गजों को चटाई धूल

सचिन पायलट को दिग्गज युवा नेता के रूप में जाना जाता है. पायलट राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ विवाद के कारण हमेशा सुर्खियों में रहे हैं. राजस्थान कांग्रेस में पायलट का जनाधार गहलोत से कहीं भी कम नहीं है.

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को पूरा देश युवा दिवस के रूप में मनाता है. स्वामी विवेकानंद अपने ओजपूर्ण और बेबाक भाषणों के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय हुए. विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल में हुआ था. विवेकानंद की जब भी बात होती है तो अमरीका के शिकागो में 1893 में उनके दिए गए भाषण की चर्चा जरूर होती है. उनके जैसा आजतक न कोई हो पाया है और न कोई दूसरा जन्म लेगा. वर्तमान राजनीति की बात करें, तो कई ऐसे दिग्गज युवा नेता और नेत्री हैं, जिसने अपने काम और नेतृत्व कौशल व बोलने के अंदाज से लोगों को काफी प्रभावित किया है. हम युवा दिवस के मौके पर ऐसे ही देश के दिग्गज और ओजस्वी युवा राजनेताओं के बारे में बात करने वाले हैं.

1. सचिन पायलट – सचिन पायलट को दिग्गज युवा नेता के रूप में जाना जाता है. पायलट राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ विवाद के कारण हमेशा सुर्खियों में रहे हैं. राजस्थान कांग्रेस में पायलट का जनाधार गहलोत से कहीं भी कम नहीं है. वो राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री भी रहे हैं. कांग्रेस के स्टार नेताओं में शामिल पायलट यूपीए सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हैं. 2023 विधानसभा चुनाव में पायलट टोंक से विधायक चुने गए हैं.

2. अनुराग ठाकुर – भारतीय राजनीति में अनुराग सिंह ठाकुर को सबसे तेज तर्रार युवा नेता के रूप में जाना जाता है. ठाकुर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं, जो 2009 के उपचुनाव, 2014 और 2015 के आम चुनावों में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. हालांकि अनुराग ठाकुर को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता प्रेम कुमार धूमल हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. अनुराग ठाकुर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में खेल, युवा मामलों के मंत्री और सूचना और प्रसारण मंत्री हैं. इससे पहले, ठाकुर वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं. अनुराग ठाकुर ने नवंबर 2000 में जम्मू और कश्मीर के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच खेला था. उन्होंने हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक मैच खेला है और 2000 और 2001 सीजन में जम्मू और कश्मीर के खिलाफ एक मैच में कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व किया है. यही नहीं अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

3. ज्योतिरादित्य सिंधिया – भारतीय राजनीति में ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया को भला कौन नहीं जानता. ओजस्वी भाषण देने के लिए ज्योतिरादित्य जाने जाते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार में ज्योतिरादित्य केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हैं. ये मध्य प्रदेश के गुना संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया मनमोहन सिंह सरकार में भी केन्द्रीय मंत्री रहे. ज्योतिरादित्य को भी राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता स्व श्री माधवराव सिंधिया भी दिग्गज राजनेता थे. ज्योतिरादित्य 10 मार्च 2020 को अंतरिम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बाहर हो गये और 11 मार्च 2020 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये.

4. आदित्य ठाकरे – आदित्य ठाकरे के बहुत थोड़े समय में ही राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है. उद्धव ठाकरे के पुत्र के रूप में ठाकरे ने राजनीति की शुरुआत की, लेकिन बहुत जल्द ही अपनी अलग क्षवि बना ली. महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में आदित्य ठाकरे पर्यटन और पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं. राजनीति के अलावा उन्हें कविता और गीत लेखन में रूची रही है. जब एकनाथ शिंद ने कुछ विधायकों के साथ उद्घव ठाकरे सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गयी थी, तब आदित्य ठाकरे ने सामने आकर बीजेपी और शिंदे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.

5. तेजस्वी यादव- बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव वर्तमान राजनीति में देश के दिग्गज युवा नेताओं में पहचाने जाने लगे हैं. 34 साल के तेजस्वी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के छोटे बेटे हैं. तेजस्वी को राजनीति विरासत में मिली है. तेजस्वी राजनीति में उतरने से पहले क्रिकेटर रहे हैं. इन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए आईपीएल भी खेला है. तेजस्वी यादव महज 26 साल की उम्र में बिहार का उप मुख्यमंत्री बन गए थे. वो देश के सबसे युवा नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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