Fire in Bus : ब्रिज पर दौड़ती रही यात्रियों से भरी "द बर्निंग बस"

Fire in Bus : जान बचाने को कोई खिड़की से कूदा तो कोई गेट से बाहर निकला. लक्जरी बस बाबूघाट से अन्य राज्य के लिए यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी. विद्यासागर सेतु पर पहुंचते हीं पिछले चक्के में आग लग गई. अनजान चालक बस दौड़ाता रहा.

कोलकाता से विकास की रिपोर्ट
Fire in Bus : सेकंड हुगली ब्रिज पर यात्रियों से भरी एक लक्जरी बस में गुरुवार रात 10 बजे के करीब अचानक आग लग गई. इस बात से अनजान चालक आग लगे हालात में बस को दौड़ाता रहा. आसपास से गुजर रहे अन्य वाहनों के चालकों ने शोर मचाकर बस चालक को बस में आग लगने की जानकारी दी. जिसके बाद बस को ब्रिज के एक छोर पर रोका गया और इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई.

इधर, बस में आग लगने की बात सुनकर अंदर मौजूद यात्री डर गए. कोई यात्री बस की खिड़की से बाहर निकला, कोई कूद कर गेट से बाहर निकला. इसी बीच अन्य पुलिसकर्मी भी वहां पहुंच गए और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकला. दमकल की दो गाड़ियों के साथ दमकलकर्मी वहां पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए.

बस के बाईं ओर के चक्के में लगी आग

प्राथमिक जांच में पता चला कि बस के बाईं ओर के चक्के में किसी तरह आग लग गई थी. इधर, सामने दाहिने ओर बैठे चालक को इसकी भनक नहीं लगी, जिसके कारण काफी दूर तक आग लगे हालत में वह बस ड्राइव करता रहा. वहीं बस में यात्रियों का सामान होने के साथ छत पर अन्य माल मौजूद था, इसके अलावा ब्रिज पर तेज हवा चलने के कारण आग काफी तेजी से फैलने लगी. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. इस घटना में किसी भी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है. सुरक्षित बचाए गए यात्री काफी देर तक डरे हुए थे.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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