किसानों का ‘दिल्ली चलो’ मार्च रद्द, पुलिस ने पहले बरसाया फूल, फिर दागे आंसू गैस के गोले

Farmers Dilli Chalo March : शंभु बॉर्डर पर डटे किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले उनपर फूलों की बारिश की और फिर भी जम वे नहीं माने तो उनपर आंसू गैस की गोलियां दागीं गईं.

Farmers Dilli Chalo March : किसानों का ‘दिल्ली चलो’ मार्च आज रद्द कर दिया गया है. किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि एक किसान घायल हो गया है और उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया है. आज मौसम भी किसानों के अनुकूल नहीं है, 8-9 किसान भी घायला हैं. सरवन सिंह ने बताया कि आज मार्च को रद्द किया जाता है, आगे के आंदोन के बारे में तारीख तय करके जानकारी दी जाएगी. रविवार को किसानों ने दिल्ली चलो अभियान की जानकारी दी थी.

पुलिस ने किसानों पर बरसाए फूल

शंभु बॉर्डर पर डटे किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले उनपर फूलों की बारिश की और फिर भी जम वे नहीं माने तो उनपर आंसू गैस की गोलियां दागीं गईं. शंभु बॉर्डर पर जमे किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने पहले ही सूचना दे दी थी कि हमारे 101 किसानों का जत्था दिल्ली जाएगा. हमने पहले ही सूची जारी कर दी थी. अगर पुलिस हमारे पहचान पत्रों की जांच करना चाहती, तो हम तैयार हैं. हालांकि पुलिस का कहना है कि किसानों ने पहचान पत्र दिखाने से मना कर दिया.

किसान नेता ने कहा-हम किसी भी बलिदान के लिए तैयार

सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि आज पुलिस आंसू गैस का प्रयोग ज्यादा कर रही है क्योंकि हवा का रुख हमारी ओर है. लेकिन हम किसी भी तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं. हमारी जो समस्या है उसका समाधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है, इसलिए तय उन्हें ही करना है कि वे हमारी समस्याओं का हल करेंगे या हमें दिल्ली मार्च के लिए मजबूर है.

किसानों को पुलिस ने रोका

किसानों ने दिल्ली चलो मार्च के लिए दोपहर 12 बजे का समय तय किया था. आज सुबह जब वे मार्च के लिए आगे बढ़ने लगे तो उन्हें पुलिस ने रोक दिया. मार्च के लिए आगे नहीं जाने देने पर किसानों ने पुलिस का विरोध किया. किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग रविवार से ही शुरू कर दी थी. साथ ही सड़क पर कांटे भी बिछाए गए थे ताकि किसान अपनी गाड़ी लेकर आगे ना जा पाएं.

ये है किसानों की मांग

  • -एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग
  • स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मिले कीमत
  • -किसानों को कर्ज माफी मिले
  • -आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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