Farmer Protest: इन मांगों के साथ फिर बातचीत के लिए टेबल पर बैठेंगे किसान, बोले पंढ़ेर- पीएम मोदी करें बात

आंदोलन के बीच किसान नेताओं ने जानकारी दी कि बातचीत के लिए सरकार की ओर से चिट्ठी मिली है, जिसके लिए वो तैयार हैं. यहां चर्चा कर दें कि सैकड़ों की संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर जमे हुए हैं. जानें ताजा अपडेट

किसान आंदोलन को लेकर आज अहम बातचीत होने वाली है जिसपर सबकी नजर बनी हुई है. इस बीच, पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढ़ेर ने कहा है कि हम पूरी तरह सकारात्मक मइंड के साथ हैं. बैठक से हमें काफी उम्मीद है. हमें पूरा विश्वास है कि बैठक से कोई पॉजिटिव चीज ही निकलकर सामने आएगी. आगे उन्होंने कहा कि आज हमारी मंत्रियों के साथ बैठक है और हम चाहते हैं कि पीएम मोदी उनसे बातचीत करें ताकि हम अपनी मांगों के समाधान तक पहुंच सकें. हमें दिल्ली में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

किसानों की मांगें आखिर क्या हैं जानें

  • सभी फसलों की खरीद के लिए एमएसपी गारंटी कानून केंद्र सरकार के द्वारा बनाया जाए.

  • डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसलों की कीमत तय हो. यही नहीं सभी फसलों के उत्पादन की औसत लागत से पचास फीसदी ज्यादा एमएसपी किसानों को दी जाए.

  • किसान और खेत में काम करने वाले मजदूरों का ऋण माफ किया जाए.

  • किसानों को प्रदूषण कानून से बाहर रखने के संबंध में मांग किसान कर रहे हैं.

  • 60 साल से ज्यादा उम्र के किसानों को पेंशन देने की मांग किसानों की है.

  • भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 दोबारा लागू करने की मांग किसानों की है.

  • लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों को सजा देने की मांग, साथ ही आरोपियों की जमानत रद्द करने के संबंध में ठोस आश्वासन किसान चाहते हैं.

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  • मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक लगाने की मांग किसानों की है.

  • विद्युत संशोधन विधेयक 2020 को रद्द किया जाए.

  • यूपीए सरकार के द्वारा लाए गये मनरेगा में हर साल 200 दिन का काम दिया जाए, साथ ही 700 रुपये मजदूरी दी जाए.

  • किसान आंदोलन में मृत किसानों के परिवारों को मुआवजा के साथ-साथ सरकारी नौकरी देने की मांग किसान कर रहे हैं.

  • नकली बीज, कीटनाशक दवाइयां और खाद वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा जाए और कड़ा कानून बनाया जाए.

  • फसल बीमा सरकार खुद करे.

  • मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन करने की मांग.

  • संविधान की 5वीं सूची को लागू की जाए ताकि आदिवासियों की जमीन की लूट बंद हो.

दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर किसान आंदोलन लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी देखने को मिला. सुरक्षाकर्मियों के साथ किसानों की झड़प हुई. इसके बाद खबर आई कि किसान संगठन और केंद्र सरकार के बीच गुरुवार तीसरे दौर की बातचीत होगी. बैठक शाम 5 बजे रखी गई है.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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