Energy Transition : रिन्युएबल एनर्जी की हिस्सेदारी हुई 37%, 2030 का लक्ष्य 223 अरब डॉलर में पूरा होगा

सरकार ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किये हैं, उनके मार्ग में कई तरह की बाधाएं हैं, जिनमें सबसे बड़ी बाधा एक रिपोर्ट के अनुसार फंडिंग है. ब्लूमबर्ग एनईएफ की नवीनतम रिपोर्ट के सौर और पवन ऊर्जा को स्थापित करने के लिए 2030 तक भारत को 223 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी.

भारत सरकार का लक्ष्य यह है कि 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन के जरिये कुल बिजली आपूर्ति का आधा प्रदान किया जाये. इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वादा भी कर चुके हैं. उन्होंने नवंबर 2021 में COP26 सम्मेलन में यह कहा था कि ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम किया जायेगा. 2030 तक 45% तक उत्सर्जन को कम करने की योजना है. इस योजना के तहत उत्सर्जन को 2005 के स्तर से नीचे लाया जायेगा.

गैर-जीवाश्म ईंधन की क्षमता बढ़ाने में बाधाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गैर-जीवाश्म ईंधन की क्षमता 500 गीगावाट से अधिक की जायेगी. साथ ही उन्होंने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य भी निर्धारित किया है. यह बात बोलने में जितनी सहज है, इस योजना का क्रियान्वयन उतना ही कठिन है. इसके लिए सरकार को कई योजनाएं बनाने होंगी और उनपर गंभीरता से काम भी करना होगा.

कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बाधाएं

सरकार ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किये हैं, उनके मार्ग में कई तरह की बाधाएं हैं, जिनमें सबसे बड़ी बाधा एक रिपोर्ट के अनुसार फंडिंग है. ब्लूमबर्ग एनईएफ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा के नवीनतम स्रोत यानी सौर और पवन ऊर्जा को स्थापित करने के लिए 2030 तक भारत को 223 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी.

ऐसे बढ़ेगी वित्तपोषण की उपलब्धता

पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से ‘फाइनेंसिंग इंडियाज 2030 रिन्यूएबल्स एम्बिशन’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में यह पाया गया है कि भारतीय कंपनियों की कॉर्पोरेट प्रतिबद्धता भारत को गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता के 500GW तक पहुंचा सकती है. इस रिपोर्ट में में अक्षय ऊर्जा के वित्तपोषण के लिए चुनौतियों की जांच भी की गयी है. साथ ही पूंजी के नये या कम उपयोग किए गए स्रोतों की पहचान भी गयी है और वित्तपोषण की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों की रूपरेखा भी बतायी गयी है.

2021 में 118 प्रतिशत बढ़ी बिजली उत्पादन क्षमता

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 से 21 के बीच में भारत की बिजली उत्पादन क्षमता में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसमें रिन्युएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 2021 में 37 प्रतिशत हो गयी है. सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसकी क्षमता 60 गीगावाट तक पहुंच गयी है. रिन्युएबल एनर्जी की हिस्सेदारी में वृद्धि सरकारी नीतियों के वजह से हुई है. वहीं देश में कोयले की क्षमता में लगातार गिरावट आ रही है. 2015 में इसमें 19 गीगावाट की गिरावट दर्ज की गयी थी. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में जो नये सौर और पवन ऊर्जा के संयंत्र लगाये जा रहे हैं वे काफी कम लागत के हैं और लोगों को फ्री बिजली भी उपलब्ध कराते हैं.

100 प्रतिशत लोगों तक पहुंची बिजली

चूंकि भारत में बिजली की डिमांड लगातार बढ़ी है और यह 2021 में 1,359TWh हो गयी है. 2011 की तुलना में 48 प्रतिशत अधिक है. इसकी वजह यह है कि बिजली अब देश की कुल आबादी के 100 प्रतिशत लोगों तक उपलब्ध है. रिपोर्ट के अनुसार भारत लगातार क्लाइमेटस्कोप बाजार के आकर्षण का केंद्र रहा है. यही वजह है कि यहां सौर और पवन ऊर्जा के कई संयंत्र लगाये जा रहे हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >