E20 फ्यूल का 1 अप्रैल 2023 से शुरू होगा फेजवाइज रोलआउट : पेट्रोलिम मंत्री हरदीप पुरी

E20 ईंधन की योजनाबद्ध शुरूआत का उद्देश्य जीवाश्म आधारित ईंधन पर निर्भरता को कम करना और वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने आज कहा कि देश अपनी कुल तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत आयात के जरिये पूरा करता है. इस आयात को कम करने और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए गन्ना और अन्य कृषि उपज से प्राप्त एथनॉल को पेट्रोल में मिलाया जा रहा है ताकि आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके. पेट्रोल में 2025 तक 20 प्रतिशत एथनाॅल मिलाने का लक्ष्य है, जिसपर सरकार काम कर रही है.

ई20 फ्यूल में 20 प्रतिशत इथेनाॅल

E20 फ्यूल के बारे में हरदीप पुरी ने बताया कि इसका फेजवाइज रोलआउट 1 अप्रैल 2023 से शुरू होगा. E20 फ्यूल इथेनॉल का 20% और जीवाश्म आधारित ईंधन का 80% मिश्रण होगा. E20 ईंधन की योजनाबद्ध शुरूआत का उद्देश्य जीवाश्म आधारित ईंधन पर निर्भरता को कम करना और वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके.

एनर्जी ट्रांजिशन की ओर जा रहा देश

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज कहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकर एनर्जी ट्रांजिशन की ओर जा रही है जिसके तहत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना तथा गैस एवं हरित हाइड्रोजन को अपनाना है. केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि सरकार हरियाणा में पानीपत (पराली), पंजाब में बठिंडा, ओडिशा में बरगढ़ (पराली), असम में नुमालीगढ़ (बांस) और कर्नाटक में देवाणगेरे समेत कई स्थानों पर पांच 2जी इथेनॉल बायो रिफाइनरी भी स्थापित कर रही है.

कोयला और पेट्रोल पर कम की जायेगी निर्भरता

सरकार ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे पूरा करने के लिए एक ओर तो सरकार सोलर एनर्जी पर फोकस कर रही है, वहीं हाल ही में सरकार ने हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी है. सरकार यह प्रयास कर रही है कि कोयला और पेट्रोल पर से निर्भरता कम की जाये. इसके लिए सरकार हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दे रही है.

ग्रीन एनर्जी का लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार ले चुकी है संकल्प

ग्रीन एनर्जी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मोदी सरकार दृढ़ संकल्प ले चुकी है. यह कहना इसलिए सही मालूम हो रहा है क्योंकि सरकार एक के बाद एक फैसले ले रही है जो ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाले हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए हितकारी हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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