चुनाव परिणामों को लेकर दिग्विजय सिंह और उदित राज ने ईवीएम पर खड़े किये सवाल

नयी दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव और कई अन्य राज्यों के उपचुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को दावा किया किया कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘टेंपर प्रूफ’ नहीं है और उसके साथ चुनिंदा ढंग से छेड़छाड़ की गयी है. कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने भी ईवीएम पर सवाल खड़ा किया और कहा कि जब उपग्रह को नियंत्रित किया जा सकता है, तो फिर ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती.

नयी दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव और कई अन्य राज्यों के उपचुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को दावा किया किया कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘टेंपर प्रूफ’ नहीं है और उसके साथ चुनिंदा ढंग से छेड़छाड़ की गयी है. कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने भी ईवीएम पर सवाल खड़ा किया और कहा कि जब उपग्रह को नियंत्रित किया जा सकता है, तो फिर ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती.

दूसरी तरफ, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने उदित राज का नाम लिये बगैर कहा कि ईवीएम पर सवाल खड़े करने का सिलसिला बंद होना चाहिए, क्योंकि इसके साथ छेड़छाड़ का दावा अब तक वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो सका है. मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा उप चुनावों में कांग्रेस की ज्यादातार सीटों पर हार के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, ”ईवीएम टैंपर प्रूफ नहीं हैं और उनमें चुनिंदा ढंग से छेड़छाड़ की गयी है.

राज्य में कुछ ऐसी सीटें हैं, जो हम किसी भी परिस्थिति में नहीं हार सकते, लेकिन हमें वहां हजारों वोटों से हार मिली है.” उन्होंने कहा, ”हम बुधवार को एक बैठक करेंगे और परिणामों का विश्लेषण करेंगे.” उदित राज ने ट्वीट किया, ”जब मंगल ग्रह और चांद की ओर जाते उपग्रह की दिशा को धरती से नियंत्रित किया जा सकता है, तो ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती?”

कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी किया, ”अमेरिका में अगर ईवीएम से चुनाव होता, तो क्या डोनाल्ड ट्रंप हार सकते थे?” कांग्रेस सांसद कार्ति ने ट्वीट किया, ”नतीजा चाहे कुछ भी हो, लेकिन अब ईवीएम को जिम्मेदार ठहराना बंद होना चाहिए. मेरे अनुभव के मुताबिक, ईवीएम की व्यवस्था मजबूत, उचित और भरोसेमंद है. यह राय मेरी हमेशा से रही है.”

उन्होंने कहा, ”राजनीतिक दलों की ओर से ईवीएम पर सवाल खड़े किये जाते हैं और खासकर चुनाव परिणाम के अपने अनुकूल नहीं होने पर ऐसा होता है. अब तक इस दावे को वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं किया जा सका है.”

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