लो देखो वीडियो, देवेंद्र फडणवीस ने जारी किया वीडियो, जानें आखिर कैसे 20 साल बाद साथ आए राज और उद्धव ठाकरे

Maharashtra Politics : राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का पुराना वीडियो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जारी किया. वीडियो के साथ उन्होंने तंज भरे अंदाज में लिखा–लाव रे तो व्हिडीओ…इस वीडियो में दोनों चचेरे भाई एक दूसरे पर हमलावर नजर आ रहे हैं. देखें ऐसा क्या है वीडियो में.

Maharashtra Politics : लाव रे तो व्हिडीओ…वीडियो जो जारी किया गया इसमें राज और उद्धव एक दूसरे को निशाना बनाते दिख रहे हैं.  फडणवीस ने दोनों के पुराने झगड़ों के वीडियो को दिखाते हुए कहा कि अब एकजुट हुए ठाकरे चचेरे भाई मराठी लोगों के लिए नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक बची-खुची साख बचाने में जुटे हैं. अस्तित्व बचाने की लड़ाई दोनों लड़ रहे हैं. फडणवीस ने कहा कि 15 जनवरी को होने वाला मुंबई नगर निकाय चुनाव जनता के हित से ज्यादा इन दोनों के राजनीतिक भविष्य से जुड़ा है. आइए बताते हैं आखिर उद्धव और राज ठाकरे कैसे दो दशक बाद साथ आए.

बीस साल बाद इस वजह से साथ आए दोनों भाई

जुलाई का महीना और साल 2025…करीब बीस साल बाद अपने अलग हुए चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ मंच साझा करते राज ठाकरे नजर आए. इस दौरान राज ने कहा कि जो काम बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए, वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया. यह बयान ऐसे समय आया था, जब एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों पार्टियों ने दावा किया कि उन्हीं के दबाव के कारण देवेंद्र फडणवीस सरकार को सरकारी स्कूलों में क्लास 1 से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने का फैसला वापस लेना पड़ा.

शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस स्वाभाविक सहयोगी क्यों?

शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस को स्वाभाविक सहयोगी माना जाता है. दोनों पार्टियों की राजनीतिक विरासत बालासाहेब ठाकरे द्वारा बनाई गई शिवसेना से जुड़ी है, जिसकी नींव मराठी पहचान पर टिकी थी. तभी से मराठी अस्मिता और गर्व का मुद्दा दोनों दलों की राजनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है. 2006 में एमएनएस बनाने के बाद से राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के विरोध को अपनी राजनीति की पहचान बना ली. वहीं उद्धव ठाकरे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए “मराठी मानूस” के मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं.

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विधानसभा चुनाव में राज और उद्धव दोनों को लगा झटका

साल 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियों का प्रदर्शन कमजोर रहा था. अब स्थानीय निकाय चुनाव के पहले दोनों भाईयों ने साझा घोषणा पत्र जारी किया है. विधानसभा चुनावों में शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. शिवसेना (यूबीटी) ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 20 सीटें ही जीत सकी. वहीं, अकेले चुनाव लड़ रही एमएनएस को और बड़ा झटका लगा. उसने जिन 135 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से एक भी सीट नहीं जीत पाई.

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Published by: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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