दलित ईसाइयों को SC दर्जा देने की मांग तेज, BRS और YSRCP ने न्यायमूर्ति बालाकृष्णन आयोग के सामने रखा पक्ष

Dalit Christians SC Status Demand: दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग तेज हो रही है. इसको लेकर तेलंगाना की मुख्य पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) और आंध्र प्रदेश में बड़े जनाधार वाली वाईएसआरसीपी ने न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन आयोग से मुलाकात की. आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में सामाजिक न्याय और समानता का हवाला दिया गया.

Dalit Christians SC Status Demand: दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. इसी मुद्दे को लेकर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा है.

बीआरएस प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से की मुलाकात

मंगलवार को नई दिल्ली में बीआरएस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन से मुलाकात की. बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने दलित ईसाइयों को एससी श्रेणी में शामिल करने की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा में पार्टी के उपनेता वद्दिराजू रविचंद्र, पूर्व मंत्री कोप्पुला ईश्वर, बीआरएस के महासचिव आर.एस. प्रवीण कुमार और पूर्व निगम अध्यक्ष राजीव सागर समेत कई नेता शामिल थे.

इससे पहले वाईएसआरसीपी भी पहुंची थी आयोग के पास

बीआरएस से पहले वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति भी पार्टी प्रतिनिधियों के साथ आयोग की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति बालाकृष्णन से मिले थे. उन्होंने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों को शामिल करने की मांग वाला विस्तृत ज्ञापन आयोग को सौंपा था.

अपने पत्र में गुरुमूर्ति ने लिखा, ‘मैं समानता, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और वास्तविक भेदभाव-रहित व्यवस्था जैसे संवैधानिक सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों को संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के दायरे में शामिल करने का आग्रह करता हूं.’

आंध्र प्रदेश विधानसभा के प्रस्ताव का भी दिया हवाला

गुरुमूर्ति ने अपने ज्ञापन में 24 मार्च 2023 को आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी उल्लेख किया. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और वाईएसआरसीपी सरकार ने माना था कि दलित ईसाई आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं.

पत्र में कहा गया, ‘आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 24 मार्च 2023 को सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया था कि दलित ईसाई उसी स्तर तक सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से वंचित हैं, जिस स्तर तक हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले अनुसूचित जाति समुदाय हैं. इसलिए उन्हें भी एससी सूची में शामिल किया जाना चाहिए.’

ये भी पढ़ें:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सहमति से बने शारीरिक संबंध चरित्रहीनता का प्रमाण नहीं

ये भी पढ़ें:- राज्यसभा चुनाव: बीजेपी के लोग ‘नोटों से भरी थैली’ लेकर पहुंच रहे हैं विधायकों के पास, कांग्रेस का आरोप

धर्म परिवर्तन से खत्म नहीं होती सामाजिक चुनौतियां: गुरुमूर्ति

गुरुमूर्ति ने आयोग के सामने यह तर्क भी रखा कि दलित ईसाइयों को एससी सूची से बाहर रखना धर्म आधारित वर्गीकरण के समान है. उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन होने भर से जातिगत भेदभाव और सामाजिक पिछड़ापन समाप्त नहीं हो जाता.

उन्होंने यह भी कहा कि समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता.

संविधान के अनुच्छेद 341 का किया उल्लेख

अपने ज्ञापन में सांसद ने संविधान के अनुच्छेद 341(2) का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि यह प्रावधान संसद को किसी समुदाय को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने का अधिकार देता है. गुरुमूर्ति ने आयोग से आग्रह किया कि मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सकारात्मक सिफारिश की जाए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >