CSPOC: महिलाओं की भागीदारी लोकतांत्रिक वैधता को सुदृढ करने का कर रही है काम
शासन के तीनों स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण, संसदीय प्रतिनिधित्व में लैंगिक संतुलन के साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दिखाता है.
CSPOC: महिलाओं के नेतृत्व में स्थानीय निकाय, जवाबदेही के साथ अधिक पारदर्शिता व सशक्त तरीके से काम कर रहा है. महिलाओं की अभूतपूर्व स्तर की भागीदारी अब स्थानीय शासन की गुणवत्ता में ठोस सुधार के रूप में दिखाई देने लगी है. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों (सीएसपीओसी) के लाइटनिंग राउंड सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही. इस सत्र का विषय था ‘भारत की त्रिस्तरीय शासन प्रणाली में महिलाओं का योगदान’.
हरिवंश ने कहा कि शासन के तीनों स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण, संसदीय प्रतिनिधित्व में लैंगिक संतुलन के साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दिखाता है.
स्थानीय शासन में दिख रहा महिलाओं का प्रभाव
संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से युक्त भारत की तीन-स्तरीय लोकतांत्रिक संरचना में शासन के विभिन्न स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी के भारत के प्रत्यक्ष अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह ढांचा केंद्र, राज्यों और जमीनी स्तर की संस्थाओं के बीच वर्टिकल पावर डिवीजन पर आधारित है. विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर महिलाओं को संवैधानिक एवं संस्थागत रूप से शामिल किए जाने के कारण भारत की इस पहल को वैश्विक महत्व प्राप्त हुआ है.
भारत का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं की भागीदारी लोकतांत्रिक वैधता को सुदृढ करती है और शासन के परिणामों में सुधार लाती है. भारत में परंपरागत रूप से और पीढ़ियों से महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में सहभागिता का इतिहास रहा है. सामूहिक विचार-विमर्श में महिलाओं की भूमिका का हमेशा से महत्व रहा है.
विश्व में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा प्रयोग
भारत के संवैधानिक विकास का उल्लेख करते हुए उपसभापति ने कहा कि स्वतंत्रता से बहुत पहले, 1920 के दशक में ही कई प्रांतों में महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया गया था. 1950 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाकर भारत ने गणराज्य की स्थापना के साथ ही राजनीतिक समानता सुनिश्चित करते हुए एक साहसिक और प्रगतिशील कदम उठाया.
उपसभापति ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से लैंगिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया गया, जिनके तहत ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य किया गया. इसके बाद दो-तिहाई से अधिक राज्यों ने ग्रामीण स्थानीय निकायों में और लगभग आधे राज्यों ने शहरी स्थानीय निकायों में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है.
महिलाओं की भागीदारी के व्यापक स्तर को रेखांकित करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका और निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 15 लाख महिलाएं स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने इसे विश्व में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा प्रयोग बताया.
