कोरोना लॉकडाउन के बीच किसान करें खेती-बाड़ी, सरकार ने कृषि से जुड़े कार्यों की दी छूट

कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए देश लॉकडाउन है. बिना किसी ठोस कारण के घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है. हालांकि सरकार ने जारी लॉकडाउन के बीच किसानों को खेती-बाड़ी करने से छूट दी है.

कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए देश लॉकडाउन है. बिना किसी ठोस कारण के घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है. हालांकि सरकार ने जारी लॉकडाउन के बीच किसानों को खेती-बाड़ी करने से छूट दी है. इस दौरान रासायनिक खाद , कीटनाशक और बीजों का उत्पादन, वितरण और उसकी बिक्री भी होती रहेगी. केंद्रीय गृह सचिव के हस्ताक्षर से जारी एक आदेश के मुताबिक इस दौरान भी किसान खुद और मजदूरों के साथ खेत में काम कर सकेंगे. यही नहीं कृषि उपकरणों को किराए पर देने वाले कस्टम हायरिंग सेंटर भी सुचारू रूप से काम करेंगे. लॉकडाउन के दौरान रासायनिक खाद , कीटनाशक और बीजों का उत्पादन, वितरण और उसकी बिक्री भी होती रहेगी. किसान तैयार फसल को मंडी तक ले जा सकेंगे और उसकी सरकारी एजेंसियां खरीद करेंगी. गेहूं फसल काटने को मौसम को देखते हुए सरकार ने कंबाइन हार्वेस्टर और इस तरह के अन्य उपकरणों की एक राज्य से दूसरे राज्य में होने वाली आवाजाही को भी लॉक डाउन से छूट दे दी है.

बता दें कि यह लॉकडाउन 21 दिनों का है जो 14 अप्रैल को खत्म होगा. इस दौरान पूरे देश में कर्फ्यू लगाया गया है. सड़क पर चलने की अनुमति नहीं है. लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है. जरूरी सामानों को ध्यान में रखा गया है. इसलिए किराना और मेडिकल स्टोर्स को कुछ घंटे की छूट दी गई है. ये दुकानें सुबह 7-10 खुली रहती हैं. गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश के अनुसार राशन, खाने-पीने की चीज, फल-सब्जी, मीट, मछली और डेयरी आदि आवश्यक चीजों से संबंधित दुकानों को इस लॉकडाउन से छूट दी गयी है. बता दें कि देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है. ताजा रिपोर्ट तक देश में 1071 मामले सामने आए हैं जबकि 29 की मौत हुई है. सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और केरल है. बिहार में भी 11 मामलों की पुष्टि हुई है.जरूरी सामानों की निर्बाध सप्लाई होती रहे इसके लिए वेयरहाउस और गोदाम भी खुले रहेंगे. इन जरूरी चीजों की ढुलाई करने वाले वाहन, ड्राइवर और लोडर्स (सामान लादने वाले) और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को भी छूट इसके दायरे में रखा गया है.

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By Utpal Kant

Utpal Kant is a contributor at Prabhat Khabar.

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