COVID-19 : हॉट स्पॉट इलाकों में एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट से हो सकती है कोरोना संक्रमित लोगों की पहचान

देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों (हॉट स्पॉट) में एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट के जरिये संक्रमितों का त्वरित गति से पहचान की जा सकती है.

नयी दिल्ली : देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों (हॉट स्पॉट) में एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट के जरिये संक्रमितों का त्वरित गति से पहचान की जा सकती है. कोरोना वायरस के मामलों की त्वरित पहचान करने के मद्देनजर कोविड-19 के संवेदनशील इलाकों या जहां से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं, वहां के लोगों का ‘एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट’ किया जा सकता है.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपने अंतरिम परामर्श में कोरोना वायरस से ज्यादा प्रभावित इलाकों में ‘रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट’ कराने का सुझाव दिया. सिफारिश का फैसला स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल की एक आपात बैठक में गुरुवार को लिया गया.

आईसीएमआर ने अपने अंतरिम परामर्श में कहा कि ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की जांच रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के जरिये की जा सकती है. इस जांच में संक्रमित पाये मामलों की पुष्टि गले या नाक से लिए गये नमूनों के आरटी-पीसीआर से की जाएगी और एंटीबॉडी जांच नकारात्मक पाये जाने पर उन्हें घर पर ही पृथक रहना होगा. इसके नतीजे 15-30 मिनट में आ जाते हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में 20 संवदेशनशील स्थानों (हॉट स्पॉट) की पहचान की है, जहां कोविड-19 के सबसे अधिक मामले हैं और 22 ऐसे स्थानों की पहचान भी की है, जो जल्द संवेदनशील स्थानों की सूची में शामिल हो सकते हैं.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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