Coronavirus Outbreak : 31 मई से रोजाना एक लाख कोरोना टेस्ट करेगी सरकार, ये है प्लान

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है. वैसे में कोरोना टेस्ट में तेजी लाने पर विचार किया जा रहा है. संक्रमितों का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा टेस्ट पर जोर दे रही है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने मंगलवार को जैव तकनीक विभाग के 18 शोध संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना वायरस के इलाज और टीके को विकसित करने के लिये जारी शोध कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने कोविड-19 के परीक्षण की स्वदेशी किट भी यथाशीघ्र विकसित करने की जरूरत पर बल दिया.

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है. वैसे में कोरोना टेस्ट में तेजी लाने पर विचार किया जा रहा है. संक्रमितों का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा टेस्ट पर जोर दे रही है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने मंगलवार को जैव तकनीक विभाग के 18 शोध संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना वायरस के इलाज और टीके को विकसित करने के लिये जारी शोध कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने कोविड-19 के परीक्षण की स्वदेशी किट भी यथाशीघ्र विकसित करने की जरूरत पर बल दिया.

डॉ हर्षवर्धन ने कहा, हम 31 मई तक आरटी-पीसीआर और एंटीबॉडी टेस्ट किट भारत में ही तैयार करने लगेंगे. उन्होंने बताया, हमारा लक्ष्य 31 मई से हर दिन एक लाख टेस्ट करने का है. गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमण के 1594 नये मामले सामने आये हैं. इसके साथ ही संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 29,974 हो गयी है.

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स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की संख्या बढ़कर 7027 हो गयी है. यह कुल संक्रमित मरीजों की संख्या का 23.3 प्रतिशत है. उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान 684 मरीजों को स्वस्थ्य होने पर अस्पताल से छुट्टी दी गयी है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण से देश में अब तक 937 लोगों की मौत हो चुकी है.

मंत्रालय ने प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज के दावों को भ्रामक बताया

मंत्रालय ने प्लाज्मा पद्धति से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज को लेकर किये जा रहे दावों को गलत बताते हुये स्पष्ट किया कि इस तरह की किसी पद्धति को मान्यता नहीं दी गयी है. अग्रवाल ने प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज के दावों को भ्रामक और गैरकानूनी बताते हुये कहा कि फिलहाल यह पद्धति प्रयोग एवं परीक्षण के दौर में है. उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कोविड-19 के इलाज में यह कारगर साबित हुयी है.

उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी पद्धति से कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करना मरीज के जीवन के लिये घातक साबित हो सकता है इसलिये आईसीएमआर द्वारा इसे इलाज की पद्धति के रूप में मान्यता दिये जाने तक इसे उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता है. अग्रवाल ने संक्रमण को रोकने के उपायों के असर की जानकारी देते हुये बताया कि जिला स्तर पर चलाये जा रहे संक्रमण रोधी अभियान के कारण देश के 17 जिले ऐसे हैं, जिनमें पिछले 28 दिनों से संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

सोमवार को ऐसे जिलों की संख्या 16 थी. उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल के बाद इस सूची में दो जिले (पश्चिम बंगाल का कलिंगपोंग और केरल का वायनाड) जुड़े हैं. वहीं, बिहार के लखीसराय जिले में संक्रमित मरीज मिलने के कारण यह जिला इस सूची से बाहर हो गया है.

अग्रवाल ने बताया कि मंत्रालय ने बेहद मामूली लक्षणों वाले संक्रमित मरीजों को घर में ही पृथक रख कर इलाज और देखभाल करने के बारे में दिशानिर्देश जारी किये हैं. उन्होंने बताया कि ये दिशानिर्देश पिछले दिनों संदिग्ध मरीजों के पृथकवास के बारे में जारी किये गये दिशानिर्देशों को ही विस्तार देते हुये जारी किये गये हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुत मामूली लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल के बजाय घर में ही पृथक रखना अधिक सुरक्षित होने के कारण यह व्यवस्था दी गयी है. इसमें मरीज और उसकी नियमित देखभाल के लिये निर्दिष्ट व्यक्ति (केयर गिवर) के लिये विशेष सुरक्षा उपाय सुझाये गये हैं.

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Author: ArbindKumar Mishra

Published by: Prabhat Khabar

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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