काॅन्ट्रेक्ट कर्मचारी ने कर्नाटक में की महिला अधिकारी की हत्या, पुलिस ने हिरासत में लिया

यह ऑपरेशन दक्षिण बेंगलुरू के डीसीपी के नेतृत्व में आयोजित किया गया. पुलिस की ओर से बताया गया कि वह ड्राइवर के रूप में काम करता था. उसे कुछ ही दिनों पहले नौकरी से हटाया गया था. वह एक काॅन्ट्रेक्ट कर्मचारी था और और उसे कुछ ही दिन पहले हटाया गया था.

बेंगलुरु पुलिस ने सोमवार को एक व्यक्ति को कर्नाटक की महिला अधिकारी केएस प्रतिमा की हत्या के मामले में हिरासत में ले लिया. गिरफ्तार व्यक्ति का नाम किरण है जो केएस प्रतिमा के कार्यालय में कांट्रेक्ट कर्मचारी के रूप में कार्य करता था. पुलिस की ओर से यह जानकारी भी दी गई है कि घटना के बाद आरोपी राज्य के चामराजनगर भाग गया था, जहां से उसे सोमवार को गिरफ्तार किया गया.

प्रतिमा मर्डर केस में एक संदिग्ध गिरफ्तार

हत्या के आरोपी के बारे में जानकारी देते हुए बेंगलुरू पुलिस कमिश्नर बी दयानंद ने बताया कि प्रतिमा मर्डर केस में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन दक्षिण बेंगलुरू के डीसीपी के नेतृत्व में आयोजित किया गया. पुलिस की ओर से बताया गया कि वह ड्राइवर के रूप में काम करता था. उसे कुछ ही दिनों पहले नौकरी से हटाया गया था. वह एक काॅन्ट्रेक्ट कर्मचारी था और और उसे कुछ ही दिन पहले हटाया गया था.

कर्नाटक के माइंस एंड जियोलाॅजी विभाग में कार्यरत थीं प्रतिमा

केएस प्रतिमा 37 साल की अधिकारी थीं, जो कर्नाटक के माइंस एंड जियोलाॅजी विभाग में डिप्टी डायरेक्टर थीं. रविवार रात को उनके आवास पर उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. प्रतिमा के शरीर पर चोट के कई निशान थे और उनके गले को भी काटा गया था. प्रतिमा ने शिवमोगा से एमएससी की डिग्री ली थी. वे पिछले डेढ़ साल से बेंगलुरू में नौकरी कर रही थीं. इससे पहले वे रामनगर में काम करती थीं. प्रतिमा को कुछ समय पहले अवैध खनन मामले में सरकार ने छापेमारी के आदेश दिये थे, जिसके बाद उन्होंने बहुत ही निष्ठा के साथ अपना काम किया था, जिसकी वजह से उन्हें काम नाम भी मिला था. वे एक ईमानदार अफसर के रूप में पहचानी जाती थीं. छापेमारी के बाद से उनकी हत्या की आशंका जताई गई थी और बताया जा रहा है कि सरकार के पास भी इस संबंध में जानकारी थी.

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Published by: Rajneesh anand

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राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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