कांग्रेस को 34 साल बाद कर्नाटक में मिली सबसे बड़ी जीत, 42% वोट के साथ बनी सबसे बड़ी पार्टी

कर्नाटक में कांग्रेस 34 साल बाद धमाकेदार जीत दर्ज की है. 1989 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि उस समय बीजेपी के खाते में केवल 4 सीटें ही आयी थीं.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शानदार जीत के साथ वापसी करते हुए कांग्रेस ने बीजेपी को दक्षिण भारत में सत्ता से बाहर कर दिया है. भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत के आंकड़े से अधिक सीटें हासिल की हैं. चुनाव आयोग के रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस ने 136 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. जबकि सत्ता पर काबिज बीजेपी 65 सीटों पर सिमट गयी. जेडीएस को 19 और अन्य को केवल 4 सीटें ही मिल पायीं.

कर्नाटक में कांग्रेस ने 34 साल बाद धमाकेदार जीत दर्ज की

कर्नाटक में कांग्रेस 34 साल बाद धमाकेदार जीत दर्ज की है. 1989 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि उस समय बीजेपी के खाते में केवल 4 सीटें ही आयी थीं. हालांकि 1999 में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतरीन रहा था और पार्टी ने 132 सीटों पर कब्जा किया था. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 80 सीटें मिली थी, जबकि बीजेपी को 104 सीटों पर जीत मिली थी.

कर्नाटक की जीत से कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की किरण नजर आयी

माना जा रहा है कि कर्नाटक में मिली जीत से इस साल के आखिर में होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावना को बल मिल सकता है.

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स्थानीय मुद्दों पर कांग्रेस ने बीजेपी को मात दी

कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव को स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रखा. उसने बजरंग दल और पीएफआई जैसे संगठनों पर प्रतिबंध का वादा किया तो जनता के समक्ष पांच ‘गारंटी’ भी दी. उसने अपनी इस रणनीति से कर्नाटक में भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं और हिंदुत्व की राजनीति की धार को कुंद कर दिया. निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत का 113 सीट का जादुई आंकड़ा पार करते हुए अब तक 136 सीट जीत ली हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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