CJI Unemployed Youth Cockroaches: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले बेरोजगार युवा वकीलों पर कटाक्ष किया है. चीफ जस्टिस ने कथित तौर पर फर्जी कानून की डिग्री रखने वाले वकीलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में पहले से ही न्यायपालिका पर हमला करने वाले ‘परजीवी’ मौजूद हैं और वकीलों को उनके साथ नहीं जुड़ना चाहिए.
सीजेआई ने सोशल मीडिया पर सक्रिय बेरोजगार वकीलों के बारे में कहा, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप भी उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं जो कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता और न ही पेशे में कोई जगह मिलती है. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं, कुछ दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं… और आप लोग अवमानना याचिकाएं दाखिल करते हैं.’
फर्जी कानून की डिग्रियों पर भी सख्त हुए CJI
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि फर्जी कानून डिग्रियों के मामले की जांच आदर्श रूप से सीबीआई को करनी चाहिए. सीजेआई ने कहा कि वह एक उपयुक्त मामले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दिल्ली के कई वकीलों की कानून की डिग्रियों की जांच के लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया जा सके. उन्होंने कहा कि ये वकील सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें पोस्ट कर रहे हैं और इस मामले में सीबीआई को कुछ करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मुझे उनकी कानून की डिग्रियों की वास्तविकता पर गंभीर संदेह है… वे फेसबुक, यूट्यूब आदि पर जो चीजें पोस्ट कर रहे हैं, क्या उन्हें लगता है कि हम यह सब नहीं देख रहे?’
‘काले कोट पहनने वाले हजारों लोगों की डिग्रियों पर गंभीर संदेह है’
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को लागू करने में विफल रहा है. अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता के वकील संजय दुबे द्वारा सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई. सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ज्योतिमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ‘काले कोट पहनने वाले हजारों लोगों की डिग्रियों पर गंभीर संदेह है.’
सीजेआई की बेंच उस मामले की सुनवाई कर रहा थी, जिसमें वकील ने सीनियर जज का दर्जा पाने के लिए याचिका दाखिल की थी. वकील ने कोर्ट में सीनियर वकील बनने की प्रक्रिया के कुछ नियमों को कोर्ट में चुनौती दी थी. इसके बाद ही बेंची की ओर से इतनी कड़ी टिप्पणी की गई. बेंच ने यहां तक कह दिया कि दुनिया में कोई भी सीनियर एडवोकेट बन सकता है, लेकिन वह (याचिकाकर्ता) इसके हकदार नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि अगर दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट बना दिया, तो सुप्रीम कोर्ट इसे रद्द कर देगा.
पेशे में अनुशासन मैं दिखाउंगा- सीजेआई
सीजेआई ने कहा, ‘लोगों को समझने दीजिए कि आप फेसबुक पर किस तरह की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं. मैं आपको दिखाऊंगा कि पेशे में अनुशासन किसे कहते हैं.’ न्यायमूर्ति बागची ने भी वकील से सवाल किया कि क्या वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा केवल एक स्टेटस सिंबल बनकर रह गया है, बजाय इसके कि उसका इस्तेमाल न्याय व्यवस्था में सार्थक योगदान देने के लिए किया जाए. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया.
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वकील ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करने पर विचार करने से इनकार कर दिया गया था. बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का पालन न होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका भी दायर की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में उस अवमानना याचिका को खारिज कर दिया था.
