यहां 'कमल' नहीं खिलता, चलता है 'कमलनाथ राज'! जानें छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में कितनी मजबूत है कांग्रेस

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से कांग्रेस नेता कमलनाथ नौ बार अजेय सांसद रहे चुके हैं. इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर छिंदवाड़ा के लोगों ने हमेशा यहां कांग्रेस को जीत का सेहरा पहनाया है. इसकी वजह कोई और नहीं बल्कि कमलनाथ ही रहे हैं. जानें इस लोकसभा क्षेत्र की खास बातें

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के समाप्त होने के बाद अब लोकसभा चुनाव की चर्चा तेज हो चली है. प्रदेश में एक बार फिर जहां बीजेपी सरकार बनाने जा रही है और प्रदेश की कमान मोहन यादव को देने जा रही है. वहीं दूसरी ओर सूबे के एक क्षेत्र की चर्चा तेजी से हो रही है. जी हां…हम बात छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की कर रहे हैं, मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, जिनमें से 28 पर बीजेपी के सांसद हैं और एक सीट छिंदवाड़ा पर कांग्रेस का कब्जा है. इस सीट से कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ वर्तमान में लोकसभा सांसद हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी ने कांग्रेस को पछाड़ दिया है. वहीं छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी सातों विधानसभा सीटें कांग्रेस के खाते में गई है. इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या मोदी की गारंटी इस क्षेत्र के लोगों को पसंद नहीं आई जिसकी चर्चा बीजेपी की जीत के बाद पूरे देश में हो रही है. आइए जानते हैं छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र का हाल

छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद रह चुके हैं कमलनाथ

गौर हो कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद रह चुके हैं जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका इलाके में कितना दबदबा है. पिछले 43 सालों से वे छिंदवाड़ा की राजनीति कर रहे हैं. 2018 में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद छिंदवाड़ा से 2019 में विधानसभा का चुनाव लड़ा, हालांकि छिंदवाड़ा में कमलनाथ अधिकतर लोकसभा चुनाव में ही फोकस करते नजर आते थे. हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पद पाने के बाद उन्होंने विधानसभा में फोकस किया जिसके अच्छे परिणाम नजर आए. 2018 के चुनावों में सातों विधानसभा से कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया. 2018 में छिंदवाड़ा में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर वोट डाले गए थे और 2023 में भी एक बार फिर कमलनाथ को कांग्रेस मुख्यमंत्री का फेस बताकर आगे बढ़ रही थी जिसका असर यहां साफ दिखा.

छिंदवाड़ा पर एक नजर

आइए एक नजर छिंदवाड़ा पर डालते हैं. दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पहली दफा छिंदवाड़ा से 1980 में लोकसभा के लिए चुने गये थे और 1997 में उपचुनाव में उनकी एकमात्र पराजय के साथ उन्होंने कई दफा इस लोकसभा सीट से जीत का परचम लहराया. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटें जीतने में कामयाब रही लेकिन छिंदवाड़ा से कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ ने 35 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. आपने किले को मजबूत करने के लिए पिता-पुत्र इलाके में खासे सक्रिय नजर आते हैं.

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छिंदवाड़ा लोकसभा के बारे में ये भी जानें

छिंदवाड़ा से कांग्रेस नेता कमलनाथ 9 बार अजेय सांसद रहे हैं

-सीएम बनने के बाद कमलनाथ को यहां की संसदीय सीट से इस्तीफा देना पड़ा था.

-यहां की कुल जनसंख्या 20 लाख 90 हजार 922 है, जिसमें से 75 प्रतिशत आबादी गांवों में और 24 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में निवास करती है.

-छिंदवाड़ा के 92 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म में जबकि 4 प्रतिशत लोग इस्लाम में आस्था रखते हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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