Kuno National Park: कूनो से भागी चीता 'आशा' को किया गया रेस्क्यू, यूपी में घुसने की थी आशंका

कूनो नेशनल पार्क के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश वर्मा ने बताया, रविवार की सुबह तीन डॉक्टरों और फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा की टीम ईशागढ़ पहुंची. सुबह टीम ने चीता को भगाने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे.

कूनो नेशनल पार्क से भागी मादा चीता आशा को आखिर रेस्क्यू कर लिया गया. आशा को शिवपुरी-अशोकनगर की सीमा के पास ईसागढ़ से ट्रेंकुलाइज किया और उसे फिर से कूनो नेशनल पार्क में छोड़ दिया गया. मालूम हो आशा 19 मई को पार्क से बाहर निकली थी.

आशा चीता को आखिर क्यों किया गया ट्रैंकुलाइज

चीता संचालन समिति के प्रमुख राजेश गोपाल ने पहले कहा था कि केएनपी में वापस लाने के लिए चीतों को ट्रैंकुलाइज नहीं किया जाएगा. लेकिन आशा को ट्रैंकुलाइज करना पड़ा. इस बारे में उन्होंने बताया कि चीता आशा को ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति दी गई थी क्योंकि प्रोटोकॉल के अनुसार जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं है. गोपाल ने कहा, चीतों को केवल वन क्षेत्रों में घूमने की अनुमति है. इसलिए जब चीता आशा पिछले 25 दिनों से माधव राष्ट्रीय उद्यान और चंदेरी के जंगल में घूम रही थी तो वन टीम ने हस्तक्षेप नहीं किया. लेकिन जैसे ही आशा पार्क से करीब 150 किमी दूर अशोक नगर जिले के शहरी क्षेत्र के करीब पहुंची, हमने मानक प्रोटोकॉल का पालन किया और उसे वापस लाने के लिए ट्रैंकुलाइज किया.

19 मई को आशा कुनो नेशनल पार्क से बाहर निकली थी, माधव नेशनल पार्क में बिताये 15 दिन

बताया जा रहा है कि आशा 19 मई को कोर क्षेत्र से बाहर आई और शिवपुरी में घूम रही थी. उसने शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में कम से कम 15 दिन बिताए, जहां हाल ही में तीन बाघों को छोड़ा गया था.

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वन अधिकारी ने बताया, कैसे काबू में आयी आशा

कूनो नेशनल पार्क के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश वर्मा ने बताया, रविवार की सुबह तीन डॉक्टरों और फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा की टीम ईशागढ़ पहुंची. सुबह टीम ने चीता को भगाने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे. टीम ने शाम 5 बजे फिर कोशिश की और उसे डार्ट किया. चीता के बेहोश हो जाने पर डॉक्टर और चीता के जानकारों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी और उसे पिंजरे में डाल दिया. होश आने के बाद आशा को केएनपी के जंगली इलाके में छोड़ दिया गया.

कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं 8 चीते, 6 और को छोड़ा जाएगा

कूनो नेशनल पार्क में आठ चीतों को जंगल में छोड़ दिया गया है जबकि एक शावक सहित 10 चीते बाड़े में मौजूद हैं. आने वाले महीनों में छह और चीतों को छोड़ा जाएगा.

17 सितंबर को पीएम मोदी ने नामीबिया से लाये गये चीते को कूनो में छोड़ा था

गौरतलब है कि पिछले साल 17 सितंबर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में प्रजातियों की आबादी को पुनर्जीवित करने के प्रयास के तहत नामीबिया से आठ चीतों के पहले बैच को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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