Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3 के उपकरण देख हैरान थे नासा के वैज्ञानिक, ISRO से कर दी यह मांग

इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बताया कि जिस समय चंद्रयान-3 मिशन के लिए स्पेसक्राफ्ट डेवलप किया जा रहा था इस समय अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के एक्सपर्ट्स इसरो से चंद्रयान-3 की टेक्नोलॉजी शेयर करने की मांग की थी.

चंद्रयान-3 की सफलता ने स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत को कई मील आगे कर दिया है. अब भारत की गिनती भी उन देशों में होने लगी है जिन्होंने चांद पर सफलतापूर्वक अपने यान को लैंड करा दिया है. यहीं नहीं भारत ने कई कदम आगे बढ़ते हुए चंद्रयान-3 की जो सॉफ्ट लैंडिंग करवाई है ऐसा अभी तक अमेरिका भी नहीं कर सकता है. आलम यह है कि अब नासा खुद इसरो से टेक्नोलॉजी शेयर करने की मांग करने लगा है.

दरअसल, इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बताया कि जिस समय  चंद्रयान-3 मिशन के लिए स्पेसक्राफ्ट डेवलप किया जा रहा था इस समय अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के एक्सपर्ट्स इसरो से चंद्रयान-3 की टेक्नोलॉजी शेयर करने की मांग की थी.

सोमनाथ ने कहा कि जिस समय चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च किया जा रहा था उस समय नासा के वैज्ञानिकों की एक टीम भी इसरो में मौजूद थी. वे हैरान थे कि इतने कम खर्च में भारत ने कितनी उन्नत टेक्नोलॉजी बना ली थी. इतने कम खर्च पर भारत चांद के साउथ पोल पर कैसे जा रहा है.

इसरो प्रमुख ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि भारत स्पेस के क्षेत्र में कई उपलब्धि हासिल कर चुका है. भारत अपने दम पर बेहतर रॉकेट और दूसरे उपकरण बनाने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है.

इसरो हेड क्वार्टर में मौजूद अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना ता कि इतने बेहतरीन साइंटिफिक उपकरणों कितने अच्छे और सस्ते हैं, सभी उपकरण हाई टेक्नोलॉजी युक्त हैं. उन्होंने अचरज जाहिर करते हुए पूछा था कि इसे आपने बनाया कैसे. उन्होंने इसे अमेरिका को बेचने की भी बात कही थी.

इसी कड़ी में छात्रों को संबोधित करते हुए एस सोमनाथ ने कहा कि भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. मेक इन इंडिया के तहत अधिकतर उपकरण में स्वदेशी ही इस्तेमाल कर करने लगे हैं. उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही विश्व गुरु बनेगा.

गौरतलब है कि भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया था और ऐसा करने वाला यह दुनिया का पहला देश बन गया था. इसके साथ ही भारत चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग के साथ अमेरिका, पूर्ववर्ती सोवियत संघ और चीन के बाद ऐसा करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया था.

चंद्रयान-3 के साथ साथ भारत ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य एल-1 मिशन भी लॉन्च किया है. आदित्य एल 1 को सूर्य से संबंधित अहम जानकारी इकट्ठा करने के लिए डिजाइन किया गया है.

एक सोमनाथ ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब इसरो तैयारी कर रहा है अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का, इसके इसरो मंगल, शुक्र ग्रह में भी अपने मिशन की तैयारी कर रहा है. 

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Author: Pritish Sahay

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