Chandigarh: छेड़छाड़ की शिकार छात्रा ने छोड़ दी यूनिवर्सिटी, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Chandigarh: हाईकोर्ट ने जब सवाल किया कि छात्रा किस वर्ष में थी तो यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि वह प्रथम वर्ष की छात्रा थी और उसे फीस रिफंड किया जा चुका है. आगे कोर्ट की ओर से कहा गया कि केवल फीस रिफंड करना काफी नहीं है.

Chandigarh: चंडीगढ़ इन दिनों काफी चर्चा में है. इस बार खबर पंडित लखमीचंद यूनिवर्सिटी से आयी है जहां टूर के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ होने और इसके बाद उसके यूनिवर्सिटी छोड़ने के मामले का मामला सामने आया. इसपर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है और छात्रा को मुआवजा देने को लेकर यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

याचिकाकर्ता ने क्या कहा

बताया जा रहा है कि गुरुग्राम निवासी सतबीर सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और उसे बर्खास्त करने के 15 जून 2022 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने का काम किया था. याचिकाकर्ता ने बताया कि उसे बिना नियमित जांच के बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है. याचिका का विरोध रोहतक की पंडित लखमी चंद यूनिवर्सिटी ने किया और कोर्ट को बताया कि एक टूर के दौरान याची ने एक छात्रा से छेड़छाड़ की. वह उस टूर का कोऑर्डिनेटर था और टूर से लौट कर छात्रा ने यूनिवर्सिटी छोड़ने का फैसला लिया.

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने जब सवाल किया कि छात्रा किस वर्ष में थी तो यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि वह प्रथम वर्ष की छात्रा थी और उसे फीस रिफंड किया जा चुका है. हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रा से जब छेड़छाड़ की घटना हुई तो वह यूनिवर्सिटी के टूर पर थी. छात्राओं की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी की होती है. यूनिवर्सिटी उनकी सुरक्षा से मुंह नहीं मोड़ सकती. टूर के बाद छात्रा ने यूनिवर्सिटी छोड़ दी ऐसे में उसे पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए.

केवल फीस रिफंड करना काफी नहीं

आगे कोर्ट की ओर से कहा गया कि केवल फीस रिफंड करना काफी नहीं है. इसके बाद मुआवजे की राशि को लेकर हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वहीं याची की ओर से कहा गया है कि अभी ट्रायल लंबित है और उसे दोषी करार नहीं दिया गया है. ऐसे में बर्खास्तगी का आदेश उचित नहीं है और इस पर रोक लगाने पर निर्णय लिया जाना चाहिए.

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि याची पर गंभीर आरोप लगे हैं. ऐसी कोई वजह फिलहाल मौजूद नहीं है जिसके चलते आदेश पर रोक लगायी जाए.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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