चमोली में सुरंग के अंदर जिंदगी की जंग! 12 लोग सुरक्षित निकले, 7 शव बरामद ; 3 अब भी लापता

चमोली में हुए सुरंग हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन 3 लोग अभी भी लापता हैं. सुरंग में भरा पानी और कम ऑक्सीजन बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

उत्तराखंड के चमोली जिले के पिपलकोटी में टिहरी में हुए सुरंग हादसे में कुल 22 लोग फंसे थे. अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. वहीं 7 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं और 3 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार अभियान चला रही हैं. परिजनों की निगाहें अब सुरंग के बाहर चल रहे बचाव अभियान पर टिकी हैं.

सुरंग में पानी बना चुनौती का कारण

DIG मोहसिन शाहेदी ने बताया कि करीब 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के अंदर 5 से 6 फीट तक पानी भरा हुआ है, पानी का बहाव लगातार बना हुआ है. इसके अलावा सुरंग के अंदर ऑक्सीजन का स्तर कम होने और लैंडस्लाइड के खतरे के कारण बचाव दल को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ रहा है. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

3 लोगों की तलाश जारी

NDRF और अन्य एजेंसियां पानी, कम ऑक्सीजन और भूस्खलन के खतरे के बीच लापता लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा सावधानियों के साथ अभियान जारी रहेगा. अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि बचाव दल जल्द से जल्द तीनों लापता लोगों का पता लगा सके.

चमोली की पुरानी त्रासदी ने बढ़ाई चिंता

चमोली में ऐसी घटनाएं पहले भी बड़ी तबाही का कारण बन चुकी हैं.फरवरी 2021 में चमोली के रैणी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ ने ऋषिगंगा और धौलीगंगा घाटी में भारी तबाही मचाई थी. उस हादसे में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे। इसी वजह से मौजूदा सुरंग हादसे ने एक बार फिर पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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