अहमदाबाद पुलिस ने हाई-प्रोफाइल 'बॉस स्कैम' साइबर अपराध मामले में एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. पुलिस के मुताबिक यह गिरोह पिछले 4 से 5 वर्षों से सक्रिय था और पाकिस्तान तथा चीन में बैठे साइबर अपराधियों को साइबर फ्रॉड के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा रहा था.
पश्चिम बंगाल से दो आरोपी गिरफ्तार
अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मामले में पश्चिम बंगाल से अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने छापेमारी के दौरान ऐसे उपकरण बरामद किए, जिनसे एक साथ चार सिम कार्ड चलाए जा सकते थे. आरोपियों के पास करीब 4,500 सिम कार्ड मिले, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था.
इस्लामाबाद से चल रहा था कॉल सेंटर
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सिम कार्ड विदेशों में बैठे अपराधियों तक पहुंचाए. इनका इस्तेमाल चीनी मैलवेयर और इस्लामाबाद से संचालित कॉल सेंटर के जरिए साइबर हमलों में किया जाता था. किसी व्यक्ति के लिंक पर क्लिक करते ही ठगी और अवैध पैसे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती थी.
26 राज्यों में 251 शिकायतें
पुलिस के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ देश के 26 राज्यों में अब तक 251 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. जांच से पता चला कि आरोपी साइबर अपराधियों को ओटीपी भी उपलब्ध कराते थे. अब तक करीब 21,000 ओटीपी दिए जाने की जानकारी सामने आई है और हर ओटीपी के बदले लगभग 100 रुपये लिए जाते थे.
10 हजार डिवाइस नेटवर्क से जुड़े
गिरोह ने करीब 10,000 लैपटॉप और मोबाइल फोन को अपने नेटवर्क से जोड़ा हुआ था. पुलिस ने इन सभी डिवाइस को निष्क्रिय कर दिया है. आरोपियों ने जांच एजेंसियों से बचने के लिए पहले टेलीग्राम और बाद में व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल शुरू कर दिया था.
पुलिस ने लोगों को किया अलर्ट
CP अनुपम सिंह गहलोत ने लोगों से अपील की कि बिना सत्यापन किसी भी फाइल को न खोलें और अनजान लिंक पर क्लिक न करें. उन्होंने कहा कि ऐसे लिंक साइबर अपराधियों के लिए अवैध पैसे ट्रांसफर कराने का प्रमुख हथियार बन रहे हैं. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय आरोपियों की तलाश में जुटी है.
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