बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश हुई है. कई इलाकों में खेतों को पानी की जरूरत है और धान की फसल पर भी असर पड़ रहा है. लेकिन दूसरी तरफ गंगा और उसकी कई सहायक नदियां उफान पर हैं. पटना, हाथीदह और सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. बेगूसराय के बछवाड़ा और भागलपुर के खरीक में तटबंध टूटने की खबरें भी सामने आई है.
लेकिन सवाल ये है कि जब बिहार में बारिश कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से?
बिहार में बारिश कितनी हुई है?
- मौसम विभाग द्वारा जारी 24 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में इस मानसून सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश हुई है.
- सामान्य तौर पर इस अवधि तक बिहार में करीब 711 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक करीब 414 मिलीमीटर बारिश हुई है. यानी करीब 297 मिली मीटर की कमी है.
देखिए मौसम विभाग की पूरी रिपोर्ट
कम बारिश के बावजूद बिहार में बाढ़ जैसी हालात क्यों?
सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है कि बाढ़ का पानी जरूरी नहीं कि उसी जगह की बारिश से आया हो, जहां बाढ़ दिखाई दे रही है.गंगा का इलाका बहुत बड़ा है. नदी के ऊपरी हिस्से में बारिश होती है तो उसका पानी धीरे-धीरे नीचे आता है. इसके अलावा नेपाल से आने वाली गंडक और कोसी जैसी नदियां भी बिहार में पानी लेकर आती हैं. सोन और घाघरा जैसी नदियां भी गंगा में पानी छोड़ते हैं.
यानी बिहार में बारिश कम होने के बावजूद यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है.
24 अगस्त की सुबह के आंकड़ों के मुताबिक पटना के गांधी घाट पर गंगा 49.57 मीटर थी, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है. यानी नदी करीब 97 सेंटीमीटर ऊपर थी. हाथीदह में जलस्तर 42.51 मीटर था, जो खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर था. सुल्तानगंज में नदी खतरे के निशान से करीब 1.17 मीटर ऊपर थी.
- 24 अगस्त सुबह के सरकारी आंकड़ों में गंडक के डुमरिया घाट पर जलस्तर 62.91 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 62.22 मीटर है. यानी गंडक वहां करीब 69 सेंटीमीटर ऊपर थी.
- कोसी के बलतारा में भी नदी खतरे के निशान से ऊपर थी. सोन के मनेर और बूढ़ी गंडक के खगड़िया स्टेशन पर भी जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया.
यानी इस समय मामला सिर्फ गंगा का नहीं है. कई नदियों का पानी एक साथ नीचे की ओर आ रहा है. लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि जब बिहार में बारिश इतनी कम है, तो फिर नदियां इतनी चढ़ी हुई क्यों हैं?
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गंगा समेत बिहार की दूसरी नदियों में पानी कहां से आया?
गंगा को सिर्फ बिहार में नहीं बहती है, बल्कि गंगोत्री से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने के लिए यह लगभग पूरा भारत घूम लेती है और जहां नहीं पहुंचा वहीं इसकी सहायक नदी पहुंच जाती है. यानी कि इसका पूरा नदी क्षेत्र बिहार से बहुत आगे तक फैला है. नतीजा गंगा के ऊपरी इलाके में बारिश होती है तो उसका पानी गंगा के रास्ते नीचे आता है और नेपाल और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर गंडक और कोसी जैसी नदियों पर पड़ता है. इन नदियों का पानी बिहार में पहुंचता है और आगे गंगा में मिलता है.
क्या फरक्का बराज का भी इस कहानी में कोई रोल है?
- गंगा का जलस्तर बढ़ने के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बराज के गेट खोलने का आग्रह किया है.
- बिहार सरकार का कहना है कि इससे गंगा का पानी नीचे की ओर तेजी से निकल सकेगा और बिहार में नदी के दबाव को कुछ कम करने में मदद मिल सकती है.
- दरअसल, फरक्का गंगा के पानी को नियंत्रित करने वाली एक बड़ी संरचना है. इसका एक काम गंगा के पानी के एक हिस्से को भागीरथी-हुगली नदी तंत्र की ओर ले जाना भी है.
- इसलिए फरक्का इस पूरी कहानी का एक हिस्सा जरूर है, लेकिन बिहार में अभी जो स्थिति बनी है, उसके लिए काफी हद तक ऊपर से आने वाले पानी, सहायक नदियों के बढ़े प्रवाह ही जिम्मेदार हैं.
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असली तस्वीर क्या है?
- कुल मिलाकर बिहार में इस समय एक अजीब स्थिति है. बारिश कम है, लेकिन नदियों में पानी ज्यादा है. एक तरफ जहां खेती सुखने वाली थी वहीं दूसरे तरफ अब स्थिति ये है कि वो डूब सकती है.
- हालांकि यह सुनने में विरोधाभासी जरूर लगता है, लेकिन नदी का पानी और खेत के लिए मिलने वाला बारिश का पानी एक ही चीज नहीं है. बिहार में बारिश कम होने के बावजूद अगर ऊपर की नदी घाटियों में ज्यादा बारिश होती है, तो उसका पानी नदियों के रास्ते बिहार तक पहुंच सकता है.
- यानी इस बार बिहार की कहानी सिर्फ यह नहीं है कि बारिश हुई और बाढ़ आ गई.असल कहानी यह है कि पानी कहीं और गिरा, नदियों के रास्ते बिहार पहुंचा और वहां पहुंचकर उसका दबाव गंगा, उसकी सहायक नदियों और तटबंधों पर दिखाई देने लगा.
इसीलिए एक ही समय में बिहार में दो तस्वीरें दिखाई दे रही हैं कि कहीं खेत बारिश का इंतजार कर रहे हैं और कहीं खेत डूबने वाली है.
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