पंचतत्व में विलीन हुए उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी, पुत्र मनीष ने दी मुखाग्नि

Bhuvan Chandra Khanduri: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का बुधवार को हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद 91 साल की उम्र में मंगलवार को देहरादून में निधन हो गया था.

Bhuvan Chandra Khanduri: खड़खड़ी शमशान घाट पर गमगीन माहौल में खंडूरी के पुत्र मनीष ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी. इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित प्रदेश और देश के अनेक नेता नम आंखों से खंडूरी को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद थे.

सीएम धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री की अर्थी को कंधा दिया

इससे पहले, दिवंगत नेता की पार्थिव देह को देहरादून में बलबीर रोड स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में लाया गया जहां मुख्यमंत्री समेत अन्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री की अर्थी को कंधा भी दिया. अंतिम संस्कार के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा, उनका जाना हमारे देश और राज्य के लिए एक बड़ी क्षति है. उनका जीवन हमें निरंतर प्रेरित करता रहेगा. उनकी कमी हमें हमेशा खलेगी.

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने खंडूरी को दी श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन खंडूरी के देहरादून आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे. उन्होंने खंडूरी के शोक संतप्त परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

उत्तराखंड में 19 से 21 मई तक राजकीय शोक

दिवंगत नेता के सम्मान में राज्य सरकार ने प्रदेश में बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. प्रदेश में 19 से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है और इस दौरान सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहने के साथ ही कोई शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे.

जनरल साहब के नाम से मशहूर थे खंडूरी

राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना से मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए खंडूरी ‘जनरल साहब’ के नाम से मशहूर थे और उनकी छवि एक ईमानदार और अनुशासनप्रिय प्रशासक की थी. खंडूरी 2007-2012 के बीच दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र की राजग सरकार में मंत्री भी रहे. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहते हुए देश के प्रमुख शहरों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शुरू करने का श्रेय उन्हें दिया जाता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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