'भैया इज बैक...' जमानत पर लौटे दुष्कर्म के आरोपी के पोस्टर से कोर्ट नाराज, कहा- भैया को संभालकर रखो

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारि तथा न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को पीड़िता के वकील ने बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आरोपी को जमानत दिये जाने की खुशी मनाते हुए स्थानीय इलाके में ‘भैया इज बैक' (भैया वापस आये हैं) लिखे बैनर लगाये गये हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक दुष्कर्म के आरोपी की जमानत को ‘सेलीब्रेट’ करने के मामले में सख्त नाराजगी व्‍यक्‍त की. दरअसल दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी छात्र नेता की जमानत का स्वागत करते हुए तमाम पोस्टरों और होर्डिंगों में लिखा था, “भैया इज बैक.” दुष्कर्म के एक आरोपी की जमानत पर रिहाई के बाद खुशी मनाने के लिए लगाये गये ‘भैया इज बैक’ लिखे होर्डिंग पर ध्यान आकृष्ट किये जाने के बाद नाराज सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकील से कहा कि अपने भैया से इस हफ्ते सतर्क रहने को कहना”

‘भैया इज बैक’ लिखे बैनर

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी की जमानत निरस्त करने की पीड़िता की याचिका पर विचार करने का फैसला किया. मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारि तथा न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को पीड़िता के वकील ने बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आरोपी को जमानत दिये जाने की खुशी मनाते हुए स्थानीय इलाके में ‘भैया इज बैक’ (भैया वापस आये हैं) लिखे बैनर लगाये गये हैं.

आरोपी को जमानत दिये जाने के बाद लगाये गये होर्डिंग

पीठ ने कहा कि जमानत के बाद आप खुशी किस बात की मना रहे हैं? बताया गया है कि एक होर्डिंग लगा है जिस पर लिखा है ‘भैया इज बैक’. इस होर्डिंग का क्या मतलब है.” बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि संभवत: आरोपी को जमानत दिये जाने के बाद होर्डिंग लगाये गये. आगे पीठ ने कहा कि अपने भैया से कहिए कि इस हफ्ते सतर्क रहें.

Also Read: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, कोरोना से हुई मौत पर मुआवजा का दावा के लिए सरकार ने तय की समयसीमा
हाई कोर्ट में क्‍या दी दलील

पीठ ने जमानत रद्द करने की पीड़िता की याचिका को 18 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. प्राथमिकी में आरोप है कि आरोपी ने वयस्क उम्र लड़की को शादी का झूठा वादा करके तीन साल की अवधि में अनेक मौकों पर उसके साथ यौन संबंध बनाये. उसे पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया गया था. हाई कोर्ट ने उसे जमानत देते हुए कहा था कि सुनवाई की पूरी अवधि के दौरान आरोपी को हिरासत में रखना जरूरी नहीं है. आरोपी ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि उन्होंने सहमति से संबंध बनाये थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Agency

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >