बेंगलुरु डे-केयर कांड: बच्चों के मन में बैठ गया बाथरूम का डर, नहलाने की बात सुन भागते हैं बच्चे

बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी के परिसर में चल रहे डे-केयर सेंटर की दो आया (बच्चों की देखभाल करने वाली महिला) को बच्चों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. घटना सामने आने के बाद कई माता-पिता को समझ आया कि उनके छोटे बच्चे घर पर इतने डरे-सहमे और बाथरूम से खौफ क्यों खाते थे.

बेंगलुरु के ब्रूकफील्ड स्थित कैपजेमिनी कैंपस के अंदर बने एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पेरेंट्स ने अपनी परेशानी शेयर की. ढाई साल की एक बच्ची के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि डे-केयर में दाखिले के बाद उनकी बेटी को बाथरूम से बहुत डर लगने लगा है. दोनों आईटी प्रोफेशनल हैं. करीब आठ महीने पहले अपनी इकलौती बेटी को इस डे-केयर में इन्होंने छोड़ना शुरू किया था. वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची के माता-पिता से बातचीत की.

दक्षिण-पूर्व बेंगलुरु के डीसीपी मोहम्मद सुजीथा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बच्ची के माता-पिता और वीडियो में दिख रहे दूसरे बच्चे के परिजनों से भी पूछताछ की. वीडियो में ‘लिटिल स्कॉलर्स’ डे-केयर सेंटर की आया छोटे बच्चों के साथ सख्ती और दुर्व्यवहार करती नजर आ रही हैं. एक वीडियो में एक छोटी बच्ची बाथरूम में बंद होकर रोते हुए “अम्मा… अम्मा…” पुकारती दिख रही है. बच्ची की मां ने पुलिस को बताया कि इस घटना के बाद उनकी बेटी को बाथरूम और टॉयलेट से बहुत डर लगने लगा है.

बाथरूम और टॉयलेट के नाम से डरने लगे हैं बच्चे

बच्ची के माता-पिता ने जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को बताया कि डे-केयर में दाखिले के कुछ ही समय बाद उसकी आदतें बदलने लगी थीं. वह बाथरूम या टॉयलेट जाने से मना कर देती थी और वहां का नाम सुनते ही रोने लगती थी. नहलाने या टॉयलेट ले जाने पर भी वह कमरे से बाहर भागने की कोशिश करती थी. माता-पिता ने बताया कि पहले उन्हें इसकी वजह समझ नहीं आई, लेकिन वायरल वीडियो देखने के बाद उन्हें पता चला कि बच्ची को बार-बार बाथरूम में बंद किया जाता था. उनका मानना है कि इसी कारण उसके मन में बाथरूम और टॉयलेट का गहरा डर बैठ गया.

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बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल दिया जाता था

पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जब दो से तीन साल के बच्चे रोते या शोर करते थे, तो उनकी देखभाल करने वाली महिलाएं उन्हें डराती-धमकाती थीं. आरोप है कि बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल दिया जाता था, जबरन वेस्टर्न टॉयलेट पर बैठाया जाता था, उनके मुंह में जेट स्प्रे से पानी डाला जाता था. इतना ही नहीं उन्हें बाथरूम में बंद कर चुप रहने के लिए धमकाया जाता था.

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By Amitabh Kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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