अरविंद केजरीवाल का आरोप-बीजेपी वाले श्रीराम को भगवान नहीं मानते, अमित शाह से पूछे 5 सवाल

Arvind Kejriwal : आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरवाल ने बीजेपी पर यह आरोप लगाया है कि वे वोट तो राम के नाम पर मांगते हैं, लेकिन ये उन्हें भगवान मानते ही नहीं है. अरविंद केजरीवाल ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर यह आरोप बीजेपी और अमित शाह पर लगाए.

Arvind Kejriwal : राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी और गृहमंत्री अमित शाह तक सीधा हमला बोला है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से देश के सभी सनातनी आहत हैं. भगवान राम ने 21 राज्यों में इनकी सरकार बनवाई, केंद्र में इनकी सरकार बनवाई, लेकिन इन्हें भगवान राम की कद्र नहीं है. केजरीवाल ने गृहमंत्री अमित शाह से 5 सवाल भी पूछे.

चढ़ावे की चोरी करने में इन्हें डर नहीं लगा

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवान तो सर्वव्यापी हैं, अगर ये लोग श्रीराम को भगवान मानते, तो इन्हें चढ़ावे की चोरी करते वक्त डर लगता. उन्हें ये लगता कि भगवान सबकुछ देख रहे हैं, लेकिन इन्होंने चोरी की, जो यह साबित करता है कि इनके मन में श्रीराम को लेकर कोई श्रद्धा नहीं है.

अमित शाह से पूछे पांच सवाल

अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्रेस काॅन्फ्रेंस में गृहमंत्री अमित शाह से पांच सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि ये सवाल मैं नहीं देश की जनता उनसे पूछना चाहती है. वे सवाल इस प्रकार हैं-

  • आप राम मंदिर क्यों नहीं गए?
  • क्या आपका मन भगवान राम के दर्शन करने का नहीं करता?
  • क्या आपका राम मंदिर जाने का मन नहीं करता?
  • क्या आपको भगवान राम का आशीर्वाद चाहिए?
  • क्या आप भगवान राम को भगवान मानते हैं?

केजरीवाल ने कहा कि अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जून 2024 को हुई थी. तब से लेकर आज तक ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन अमित शाह एक बार भी रामलला के चरणों में मत्था टेकने नहीं गए. जबकि इन 891 दिनों में उन्होंने अपने भाषणों और इंटरव्यू में 42 से ज़्यादा बार राम मंदिर का जिक्र किया. इनमें अधिकांश मौकों पर भगवान श्रीराम और राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे.उनके पास भगवान श्रीराम के नाम पर वोट मांगने का समय है, लेकिन उनसे आशीर्वाद लेने का समय नहीं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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